राजस्थान में BCCI के बोन टेस्ट पर उठे सवाल, एक साल बाद खिलाड़ियों की उम्र बढ़ने के बजाय हो गई कम; चयन प्रक्रिया में भी विरोधाभास
उम्र के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अंडर-16 क्रिकेट में बोन टेस्ट यानी हड्डियों की जांच की व्यवस्था लागू की थी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र का आकलन करना और उम्र छिपाकर खेलने वाले खिलाड़ियों की पहचान करना है। हालांकि, राजस्थान के कुछ खिलाड़ियों की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद इस जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के खिलाड़ियों की मेडिकल जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एक साल बीतने के बाद भी खिलाड़ी की अनुमानित उम्र बढ़ने के बजाय कम दर्ज हुई। उम्र के आकलन में इस तरह का अंतर चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है।
मेडिकल रिपोर्ट में उम्र को लेकर विरोधाभास
बताया गया है कि तीन खिलाड़ियों की मेडिकल रिपोर्ट में उम्र से जुड़े ऐसे अंतर सामने आए हैं, जिन्हें लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, एक साल के अंतराल के बाद कुछ खिलाड़ियों की अनुमानित उम्र पहले की तुलना में कम दर्ज की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि उम्र का आकलन करने वाली जांच के नतीजों में अंतर क्यों आया और चयन के दौरान इन रिपोर्टों को किस तरह आधार बनाया गया।
इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि अंडर-16 क्रिकेट में खिलाड़ियों की उम्र पात्रता तय करने का महत्वपूर्ण आधार होती है। यदि उम्र के आकलन में अंतर आता है, तो उसका असर खिलाड़ी की पात्रता और चयन पर पड़ सकता है।
संभावित खिलाड़ियों के चयन पर भी सवाल
मेडिकल रिपोर्ट में सामने आए अंतर के साथ चयन प्रक्रिया में भी विरोधाभास का दावा किया गया है। जानकारी के मुताबिक, तीन खिलाड़ियों में से दो को संभावित खिलाड़ियों की सूची में जगह मिल गई, जबकि वास्तविक जन्मतिथि के हिसाब से सबसे कम उम्र का खिलाड़ी चयन से बाहर रह गया।
इस स्थिति ने चयन के मानकों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि बोन टेस्ट की रिपोर्ट को उम्र निर्धारित करने का आधार बनाया गया है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि अलग-अलग खिलाड़ियों के मामलों में रिपोर्ट का इस्तेमाल किस तरह किया गया। साथ ही, यह भी जरूरी है कि चयन प्रक्रिया में सभी खिलाड़ियों के लिए समान नियम लागू हों।
बोन टेस्ट की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर चर्चा
बीसीसीआई ने उम्र संबंधी फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बोन टेस्ट की व्यवस्था अपनाई है। लेकिन इस मामले में सामने आए कथित विरोधाभासों के बाद मेडिकल जांच की प्रक्रिया, रिपोर्ट की व्याख्या और चयन के आधार की समीक्षा की मांग उठ सकती है।
भास्कर के पास संबंधित खिलाड़ियों की मेडिकल रिपोर्ट की प्रतियां होने की बात कही गई है। इन दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रिपोर्ट में उम्र कम दर्ज होने के पीछे क्या कारण था और चयन समिति ने अंतिम फैसला लेते समय किन मानकों को अपनाया।
इस मामले में मेडिकल विशेषज्ञों और क्रिकेट अधिकारियों की स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यह समझा जा सकेगा कि उम्र के आकलन में अंतर कैसे आया और क्या इसका संभावित खिलाड़ियों के चयन पर असर पड़ा।

