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मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना पर सवाल: SMS अस्पताल में 20 तरह की मुफ्त दवाओं का टोटा, एस्प्रिन के लिए भी 2 किमी का चक्कर

मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना पर सवाल: SMS अस्पताल में 20 तरह की मुफ्त दवाओं का टोटा, एस्प्रिन के लिए भी 2 किमी का चक्कर

राजस्थान में मरीजों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना के तहत दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में करीब 20 तरह की मुफ्त दवाओं की कमी होने की जानकारी सामने आई है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि एस्प्रिन जैसी दवा लेने के लिए भी मरीजों को करीब दो किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। इससे अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ सकती है।

मुफ्त दवाओं की कमी से मरीज परेशान

सरकारी अस्पतालों में आने वाले अधिकतर मरीज उम्मीद करते हैं कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी दवाएं उन्हें अस्पताल परिसर में ही निशुल्क मिल जाएंगी। लेकिन यदि दवा वितरण केंद्र पर निर्धारित दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं, तो मरीजों को दूसरे केंद्रों या बाहर के मेडिकल स्टोर का सहारा लेना पड़ सकता है।

SMS अस्पताल में दवाओं की कमी से जुड़ी जानकारी के अनुसार, लगभग 20 तरह की दवाएं उपलब्ध नहीं होने की समस्या सामने आई है। इनमें एस्प्रिन के लिए मरीजों को करीब दो किलोमीटर का चक्कर लगाने की बात कही जा रही है। ऐसे में बुजुर्गों, गंभीर मरीजों और दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले लोगों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है।

योजना का उद्देश्य मरीजों को राहत देना

मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को आवश्यक दवाएं निशुल्क उपलब्ध कराना है। इस तरह की योजनाओं से मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करने और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने में मदद मिलती है।

हालांकि, योजना का लाभ तभी प्रभावी ढंग से मिल सकता है, जब अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बना रहे। किसी दवा की उपलब्धता खत्म होने पर समय रहते उसकी आपूर्ति सुनिश्चित करना और मरीजों को सही जानकारी देना जरूरी है।

दवा आपूर्ति और स्टॉक की समीक्षा जरूरी

अस्पताल में दवाओं की कमी की स्थिति सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के लिए स्टॉक की समीक्षा करना महत्वपूर्ण हो जाता है। किन दवाओं की कमी है, उनकी मांग कितनी है और नई आपूर्ति कब तक पहुंचेगी, इसकी जानकारी मरीजों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, जरूरी दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्टॉक की निगरानी और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।

फिलहाल, करीब 20 दवाओं की कमी और एस्प्रिन के लिए मरीजों को दो किलोमीटर दूर जाने संबंधी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि, दवाओं की पूरी सूची और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। इन विवरणों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कमी कितनी व्यापक है और इसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

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