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राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी, वीडियो में जाने पूर्व जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति गठित

राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी, वीडियो में जाने पूर्व जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति गठित

राजस्थान सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश Ranjana Prakash Desai की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों, सामाजिक व्यवस्थाओं और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर UCC विधेयक का मसौदा तैयार किया जाएगा, जिसे बाद में राजस्थान विधानसभा में पेश किया जा सकता है।

विधानसभा से पारित होने के बाद बनेगा कानून

सरकार की ओर से तैयार किया जाने वाला विधेयक विधानसभा में पारित होने के बाद कानून का रूप ले सकेगा। यदि यह कानून लागू होता है, तो राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियम सभी नागरिकों के लिए समान हो जाएंगे, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।

एक से अधिक विवाह पर रोक

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, राज्य में किसी भी धर्म के व्यक्ति को एक से अधिक विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। सभी नागरिकों के लिए विवाह संबंधी समान नियम लागू किए जाने की संभावना है।सरकार का तर्क है कि इससे लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा।

लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो सकता है

प्रस्तावित UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। इसके तहत साथ रहने वाले जोड़ों को अपने संबंध का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना पड़ सकता है।इसका उद्देश्य ऐसे संबंधों में रहने वाले व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना और कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

बेटा-बेटी को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार

यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत उत्तराधिकार और संपत्ति संबंधी नियमों में भी समानता लाने का प्रस्ताव है। पैतृक संपत्ति में बेटा और बेटी दोनों को बराबर अधिकार दिए जाने की व्यवस्था की जा सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और समान अधिकारों को मजबूत करेगा।

विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी

प्रस्तावित कानून में विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने की भी संभावना है। इससे वैवाहिक संबंधों का कानूनी रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों के समाधान में आसानी होगी।

जनजातीय समुदायों को मिल सकती है छूट

सरकार के प्रारंभिक संकेतों के अनुसार राज्य की स्थानीय जनजातियों को उनकी परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए नए कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों और विधेयक के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा।

व्यापक चर्चा के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

राजस्थान सरकार द्वारा गठित समिति विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और कानूनी पक्षों से सुझाव प्राप्त करेगी। इसके बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर विधेयक का अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा।राज्य में UCC लागू करने की पहल को एक महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इसके विभिन्न प्रावधानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक बहस होने की संभावना भी जताई जा रही है।

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