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प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के समर्थन में राजनीति भी हुई गरम

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के समर्थन में राजनीति भी हुई गरम

माघ मेले में पांच दिनों से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में अब राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती नजर आ रही है। धर्म और समाज के मामलों में अपनी पकड़ रखने वाले इस विवाद ने अब सियासी गलियारों में भी सुर्खियाँ बटोरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने टोंक से खुलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आवाज उठाई है, जिससे मामला राजनीतिक रूप से और अहम हो गया है।

माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना कई धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था। पांच दिनों से उनका यह प्रदर्शन लगातार ध्यान आकर्षित कर रहा है। अब इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप ने इसे और संवेदनशील बना दिया है। सचिन पायलट ने कहा कि धर्मगुरु और समाजसेवी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और उन्हें उचित सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे भारतीय समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक गरिमा से जोड़कर देखा और इसे गंभीर मामला बताया।

धरने का यह मुद्दा केवल स्थानीय नहीं रह गया है। राजनीतिक पार्टियों ने इसे अपने दृष्टिकोण से देखने और इसमें अपनी भूमिका बनाने की कोशिश की है। विश्लेषकों का कहना है कि जब धार्मिक नेतृत्व और राजनीति सीधे तौर पर जुड़ती है, तो यह सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अब तक कोई राजनैतिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनका धरना और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप इस मुद्दे को और व्यापक बना रहा है।

स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सतर्क कदम उठाए हैं। प्रयागराज माघ मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, इसलिए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय धर्मगुरुओं का कहना है कि इस तरह के धरनों का धार्मिक भावनाओं पर भी असर पड़ता है और इसे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना आवश्यक है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच कांग्रेस नेता सचिन पायलट की यह पहल उनके राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण को भी उजागर करती है। उन्होंने कहा कि धर्म और समाज के मामलों में न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है और नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे धर्मगुरुओं और समाज के लोगों के अधिकारों की रक्षा करें। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मुद्दे पर पायलट की सक्रियता कांग्रेस के लिए सकारात्मक संदेश देने का तरीका भी हो सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहाँ धर्म और राजनीति का गहरा संबंध है।

इस बीच प्रयागराज में धर्म और समाज के प्रति जागरूक नागरिक भी धरने का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि धर्मगुरु समाज में नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करते हैं, और उनके खिलाफ किसी भी तरह की अन्यायपूर्ण कार्रवाई समाज में असंतोष फैला सकती है।

माघ मेले में पांच दिनों से जारी धरना अब केवल धार्मिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। आने वाले दिनों में इस धरने और राजनीतिक समर्थन के चलते आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह पूरे देश की नजरें प्रयागराज पर टिकाए हुए हैं।

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