विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान दिवस की तिथि बदलने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राज्य की परंपरा के साथ छेड़छाड़ बताया है और कहा कि इससे प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और भावनाओं पर असर पड़ता है।
जूली ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि राजस्थान दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर की तिथि में बदलाव करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह निर्णय राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं के खिलाफ है और इससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार के “विकसित राजस्थान 2047” विजन को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे “जमीन से कटा” बताते हुए कहा कि यह विजन धरातल पर वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता। जूली का कहना है कि जब तक आम जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक ऐसे बड़े विजन केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार बड़े-बड़े लक्ष्यों की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाओं को लागू करने से पहले उनकी व्यवहारिकता और जरूरतों को समझना जरूरी है।
वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि राजस्थान को आगे बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण जरूरी है और विजन 2047 इसी दिशा में एक प्रयास है। सरकार का दावा है कि विकास योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, राजस्थान दिवस की तिथि बदलने और विजन 2047 को लेकर प्रदेश की राजनीति में गर्मी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।

