दौसा में सियासी संग्राम: विधायक दीनदयाल बैरवा और राजस्व अधिकारियों के बीच टकराव से गरमाई राजनीति, वायरल ऑडियो-वीडियो से बढ़ा विवाद
राजस्थान के दौसा जिले में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा और राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच छिड़ी तनातनी ने जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि यह विवाद अब केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर आम जनमानस तक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
बताया जा रहा है कि विधायक बैरवा और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के बीच कार्यप्रणाली और जनता से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। हाल ही में यह मतभेद खुलकर सामने आ गया, जब दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद मामला राजनीतिक रंग लेने लगा और जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया ने आग में घी डालने का काम किया है। विधायक और अधिकारियों के बीच कथित बातचीत के ऑडियो और वीडियो क्लिप्स लगातार वायरल हो रहे हैं। इन क्लिप्स में तीखी नोकझोंक और सख्त लहजे में बातचीत सुनाई दे रही है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हालांकि इन वायरल क्लिप्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी इन्हें लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
विधायक दीनदयाल बैरवा का आरोप है कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और काम में लापरवाही बरत रहे हैं। उनका कहना है कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और आम लोगों के हक के लिए आवाज उठाना उनका कर्तव्य है। वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है और नियमों के तहत काम करने में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।
इस टकराव ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और कई काम प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस विवाद का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि कई जरूरी फाइलें और मामले लंबित पड़े हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, कांग्रेस संगठन के भीतर भी मामले को सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं, ताकि पार्टी की छवि को नुकसान न पहुंचे।
फिलहाल, दौसा की राजनीति में उठी यह हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर इस विवाद का समाधान कब और कैसे निकालते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जिले की राजनीति का बड़ा केंद्र बना रह सकता है।

