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पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: बालिका अपहरण व दुष्कर्म मामले में आरोपी को 20 वर्ष कठोर कारावास, 1.10 लाख रुपये अर्थदंड

पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: बालिका अपहरण व दुष्कर्म मामले में आरोपी को 20 वर्ष कठोर कारावास, 1.10 लाख रुपये अर्थदंड

पॉक्सो (POCSO) न्यायालय क्रम संख्या-5 ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बालिका के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

यह निर्णय न्यायाधीश प्रेमराज सिंह चन्द्रावत द्वारा सुनाया गया। अदालत ने मामले को गंभीर श्रेणी का अपराध मानते हुए कहा कि नाबालिगों के खिलाफ ऐसे अपराध समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं और इनमें किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।

मामले के अनुसार, यह घटना करीब दो वर्ष पुरानी है, जब आरोपी ने एक नाबालिग बालिका का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों द्वारा तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस जांच के दौरान पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। लंबी जांच प्रक्रिया और सुनवाई के बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया गया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में समाज में कड़ा संदेश जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के गंभीर अपराध करने का साहस न करे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सजा के साथ लगाए गए अर्थदंड की राशि पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए उपयोग किए जाने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता को कानून के अनुसार सभी आवश्यक सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

इस फैसले के बाद पीड़िता के परिजनों ने राहत की भावना व्यक्त की है और न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐसे मामलों में एक सख्त संदेश देता है और पॉक्सो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यह मामला एक बार फिर नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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