हाईकोर्ट में युवतियों की याचिका: बिना FIR घर से उठाकर थाने में रखने का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
राजस्थान में पुलिस कार्रवाई को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। कुछ युवतियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर आरोप लगाया है कि 15 जनवरी 2025 की शाम उन्हें उनके घरों से उठाकर बिना किसी एफआईआर के रातभर थाने में रखा गया।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस दौरान उन्हें हिरासत में रखने के पीछे कोई लिखित शिकायत या प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी रात उन्हें थाने में रखा गया, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
मामले को लेकर अब कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है। याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि इस कथित कार्रवाई की न्यायिक जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
Rajasthan High Court ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। अदालत ने पुलिस प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन परिस्थितियों में युवतियों को हिरासत में लिया गया और क्या कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिना एफआईआर या उचित कानूनी आधार के किसी व्यक्ति को हिरासत में रखा गया है, तो यह गंभीर संवैधानिक उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों तय होती हैं।
पुलिस प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अदालत में सभी तथ्य रखे जाएंगे और प्रक्रिया के अनुसार जवाब दिया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है।

