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राजस्थान में 31 जुलाई तक नहीं होंगे पंचायत और निकाय चुनाव, वीडियो में जाने राज्य निर्वाचन आयोग ने मांगा 90 दिन का समय

राजस्थान में 31 जुलाई तक नहीं होंगे पंचायत और निकाय चुनाव, वीडियो में जाने राज्य निर्वाचन आयोग ने मांगा 90 दिन का समय

राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव फिलहाल 31 जुलाई तक कराए जाने की संभावना खत्म होती नजर आ रही है। राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया के लिए कम से कम 90 दिन का समय आवश्यक होगा।आयोग का कहना है कि यह समय तभी पर्याप्त होगा, जब राज्य सरकार अपने स्तर पर या ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए आरक्षण का निर्धारण कर दे।

हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के दिए थे निर्देश

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को दिए गए अपने आदेश में राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।अदालत के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अब निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है।

OBC आरक्षण बना सबसे बड़ी बाधा

राज्य में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण का निर्धारण अभी तक नहीं हो पाया है। जब तक आरक्षण की अंतिम सूची तय नहीं होती, तब तक वार्डों और सीटों का आरक्षण तथा चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है।निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में संकेत दिया है कि आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी मतदाता सूची, वार्डवार तैयारियां, अधिसूचना जारी करने, नामांकन, जांच, प्रचार और मतदान सहित पूरी चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 90 दिन का समय लगेगा।

सरकार के फैसले पर टिकी चुनाव प्रक्रिया

अब चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह राज्य सरकार के अगले कदम पर निर्भर है। सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट या अपने स्तर पर आरक्षण का अंतिम निर्धारण करना होगा। इसके बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकेगा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण संबंधी प्रक्रिया में हो रही देरी का सीधा असर स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के कार्यक्रम पर पड़ रहा है।

समय पर चुनाव कराना चुनौती

राज्य निर्वाचन आयोग के पत्र के बाद यह लगभग साफ हो गया है कि हाईकोर्ट द्वारा तय की गई 31 जुलाई की समय-सीमा के भीतर चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में अब सरकार और आयोग की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी। पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों का इंतजार कर रहे लाखों मतदाताओं और संभावित प्रत्याशियों के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आरक्षण तय होने के बाद ही चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ सकेगी।

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