राजस्थान में हाल ही में OMR शीट (ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन) को लेकर सियासी विवाद ने जोर पकड़ लिया है। इस विवाद ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग को जन्म दिया है, जिसमें दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू कर दिया है।
मामला तब उभरा जब राज्य के कुछ शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षाओं के दौरान OMR शीटों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। विद्यार्थियों और अभिभावकों ने शिकायत की कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं में अंक सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए या कुछ उत्तर गायब दिखाई दिए। इस मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई।
बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं की निष्पक्षता पर धब्बा लगाने के लिए जानबूझकर OMR शीटों में गड़बड़ी की गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा, "राजस्थान में छात्रों के भविष्य के साथ खेला जा रहा है। कांग्रेस सरकार छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर रही है।"
वहीं, कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार किया और कहा कि यह विवाद राजनीतिक मुद्दा बनाने की साजिश है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी केवल चुनाव और सियासी लाभ के लिए इस मामले को हवा दे रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, "शिक्षा प्रणाली में सुधार हमारी प्राथमिकता है। OMR शीटों की शिकायतों की जांच स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा की जा रही है। बीजेपी इसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए बिगाड़ रही है।"
विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी चिंता जताई है। कई छात्रों ने कहा कि उनका भविष्य सीधे तौर पर इन परीक्षाओं के अंक पर निर्भर है। "हमने कठिन मेहनत की, लेकिन अंक सही तरीके से नहीं दिए गए तो हमारा भविष्य प्रभावित होगा," एक छात्रा ने बताया।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि OMR शीट प्रणाली में त्रुटियां तकनीकी कारणों से हो सकती हैं, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप इसे और जटिल बना देता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में राज्य सरकार को केवल तकनीकी जांच और पारदर्शिता के जरिए समस्या का समाधान करना चाहिए, न कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना।
राज्य शिक्षा विभाग ने कहा कि OMR शीटों में किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायतों की गहन जांच की जा रही है। विभाग ने आश्वस्त किया कि दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी और छात्रों को उनके सही अंक प्रदान किए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी टीम शीटों की डिजिटल जांच कर रही है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस विवाद का असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक लड़ाई का जनता पर सीधा प्रभाव होता है। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में भी असंतोष फैल सकता है।
OMR शीट विवाद ने राजस्थान में सियासत की तासीर को बढ़ा दिया है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने दृष्टिकोण को जनता के सामने रखते हुए आरोपों का दौर जारी रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान ही छात्रों के हित में होगा और भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने में मदद करेगा।

