Samachar Nama
×

थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों के फर्जीवाड़े में अधिकारियों पर भी शिकंजा, हर तीसरा अफसर- कार्मिक आरोपी

थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों के फर्जीवाड़े में अधिकारियों पर भी शिकंजा, हर तीसरा अफसर- कार्मिक आरोपी

जयपुर के परिवहन विभाग में थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों के फर्जीवाड़े का मामला अब और गंभीर रूप ले रहा है। विभाग ने मामले में सभी आरटीओ और डीटीओ को आदेश दिए हैं कि वे आरोपियों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज करें। लेकिन इस प्रकरण में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि जांच के दायरे में खुद विभागीय अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों का यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था। इस फर्जीवाड़े में कुछ कार और मोटर वाहन मालिकों को कम समय में आकर्षक वीआईपी नंबर उपलब्ध कराने के बहाने मोटी रकम वसूलने की शिकायतें सामने आई थीं। अब तक की जांच में यह बात उजागर हुई है कि कुछ विभागीय अधिकारी भी इस घोटाले में शामिल थे या उन्हें सूचित किया गया था।

परिवहन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरटीओ और डीटीओ को निर्देश दिए हैं कि वे आरोपियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई करें। अधिकारियों ने कहा कि विभागीय सतर्कता बढ़ाई जा रही है और किसी भी प्रकार की मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों के फर्जीवाड़े जैसी घटनाओं में अक्सर भ्रष्टाचार और मिलीभगत की झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि जब जांच के दायरे में खुद अधिकारी शामिल हों, तो मामले की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में विभागीय पारदर्शिता और उच्च स्तर की निगरानी की जरूरत होती है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच प्रक्रिया में अब यह देखा जा रहा है कि फर्जीवाड़े में शामिल कौन-कौन से व्यक्ति हैं और कितने अधिकारी या कर्मचारी इस घोटाले में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल थे। उन्होंने बताया कि सभी दस्तावेज, रसीदें और रिकॉर्ड को ध्यानपूर्वक खंगाला जा रहा है ताकि दोषियों को न्याय दिलाया जा सके।

सामाजिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि वीआईपी नंबर फर्जीवाड़ा केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और परिवहन विभाग को इस मामले में कड़े नियम और जांच प्रक्रिया लागू करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

स्थानीय नागरिकों और वाहन मालिकों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वीआईपी नंबरों के नाम पर घोटाला और अधिकारी की मिलीभगत से आम जनता का विश्वास प्रशासन पर से उठता जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जाए और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो।

परिवहन विभाग ने इस घोटाले की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि मामले की हर बारीकियों की जांच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें शामिल हो, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस तरह जयपुर में थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों के फर्जीवाड़े का मामला अब पूरे प्रशासन और परिवहन विभाग के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। अगले कुछ दिनों में जांच के परिणाम और कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो जाएगी।

Share this story

Tags