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घाटे से उबरने के लिए रोडवेज का नया प्रयोग, परिचालकों की बड़े स्तर पर अदला-बदली शुरू

घाटे से उबरने के लिए रोडवेज का नया प्रयोग, परिचालकों की बड़े स्तर पर अदला-बदली शुरू

रोडवेज मुख्यालय ने एक नए प्रयोग के तहत लंबे समय से एक ही रूट और बस पर कार्यरत परिचालकों को अब अलग-अलग रूट और बसों में तैनात करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के तहत राज्य से बाहर लंबी दूरी की बसों में ड्यूटी कर रहे परिचालकों को अब राज्य के भीतर संचालित बसों में लगाया जा रहा है।

वहीं, स्थानीय स्तर पर काम कर रहे परिचालकों को अन्य आगार क्षेत्रों या प्रदेश से बाहर जाने वाली बसों में भेजा जा रहा है। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है और पूरे प्रदेश में इसे तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

कम आय वाले रूट पर फोकस:
सूत्रों के अनुसार, इस अदला-बदली में उन परिचालकों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनके रूट से आय कम आ रही है। रोडवेज प्रबंधन का मानना है कि लंबे समय तक एक ही रूट पर काम करने से कार्यशैली में ठहराव आ जाता है, जिसका सीधा असर राजस्व पर पड़ता है।

बदलाव से बढ़ेगी सक्रियता:
प्रबंधन का कहना है कि नए रूट और नई परिस्थितियों में काम करने से परिचालकों में नई ऊर्जा और सक्रियता आएगी। इससे वे यात्रियों के साथ बेहतर व्यवहार कर सकेंगे और टिकटिंग व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बना पाएंगे।

इसके अलावा, नए स्थानों पर तैनाती से परिचालकों को विभिन्न रूट्स का अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा।

राजस्व बढ़ाने की कोशिश:
रोडवेज का मुख्य उद्देश्य इस प्रयोग के जरिए आय में बढ़ोतरी करना और यात्रियों की संख्या में इजाफा करना है। साथ ही टिकटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बदलाव से न केवल राजस्व में सुधार होगा, बल्कि यात्रियों को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

मिश्रित प्रतिक्रिया:
हालांकि, इस निर्णय को लेकर परिचालकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ कर्मचारी इसे चुनौती के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ को नए स्थानों पर काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

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