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श्री सांवलिया सेठ मंदिर का नव निर्माण: गुजरात के अक्षरधाम की तर्ज पर तैयार हो रहा भव्य मंदिर

श्री सांवलिया सेठ मंदिर का नव निर्माण: गुजरात के अक्षरधाम की तर्ज पर तैयार हो रहा भव्य मंदिर

राजस्थान में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने के लिए श्री सांवलिया सेठ मंदिर का नव निर्माण कई वर्षों से जारी है। इस मंदिर का डिज़ाइन और स्थापत्य कार्य गुजरात के विश्व प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जिससे यह एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में उभर सके।

मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में अत्याधुनिक तकनीक और पारंपरिक वास्तुकला का संगम देखा जा रहा है। स्थानीय और राष्ट्रीय कलाकार, शिल्पकार और वास्तु विशेषज्ञ इस प्रोजेक्ट में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर का निर्माण धार्मिक ग्रंथों, शिल्प कला और वास्तुकला की समृद्ध परंपरा को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।

स्थानीय निवासी और भक्त इस निर्माण कार्य से उत्साहित हैं। उनका कहना है कि मंदिर के पूर्ण होने के बाद यह न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान हासिल करेगा। मंदिर में भविष्य में धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

मंदिर के निर्माण में सफेद संगमरमर, लाल बलुआ पत्थर और स्थानीय खनिजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। शिल्पकारों का कहना है कि मंदिर की हर मूर्ति और नक्काशी अत्यंत सावधानी और कलात्मक कौशल के साथ तैयार की जा रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मंदिर की बनावट और सजावट अक्षरधाम की भव्यता और धार्मिक गरिमा को प्रतिध्वनित करे।

स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा है। इसके अलावा, मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमिकों और शिल्पकारों के लिए रहने और कार्य की उचित सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का भव्य मंदिर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा। गुजरात के अक्षरधाम मंदिर की तरह, श्री सांवलिया सेठ मंदिर भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा से आकर्षित करेगा। साथ ही, यह मंदिर स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।

मंदिर निर्माण की इस प्रक्रिया ने स्थानीय युवाओं और कलाकारों को पारंपरिक कला और शिल्प में प्रशिक्षण लेने का अवसर भी दिया है। इसके माध्यम से धार्मिक स्थापत्य और शिल्प कला की परंपरा आगे बढ़ रही है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंदिर का नव निर्माण जल्द ही पूर्ण होने की उम्मीद है। मंदिर खुलने के बाद इसे धार्मिक यात्रियों और पर्यटकों के लिए पूरी तरह तैयार किया जाएगा।

इस प्रकार, श्री सांवलिया सेठ मंदिर का नव निर्माण न केवल राजस्थान के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध करेगा, बल्कि यह राज्य और देश में आध्यात्मिक पर्यटन के लिए एक नया केंद्र भी स्थापित करेगा। मंदिर के पूरा होने के बाद इसे भक्तों और कला प्रेमियों के लिए श्रद्धा, भक्ति और सौंदर्य का प्रतीक माना जाएगा।

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