NCERT ने हटाया कक्षा 8 की किताब से विवादित मानचित्र, इतिहास की सटीकता पर उठे सवाल
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से एक विवादित मानचित्र को हटा दिया है, जिसने भारत के इतिहास शिक्षण में बड़ी बहस को जन्म दिया था। यह कदम पाठ्यपुस्तक में दिखाए गए नक्शे को लेकर उठाए गए ऐतिहासिक आलोचना के बाद लिया गया है।
इस विवादित मानचित्र में मराठा साम्राज्य के विस्तार को दर्शाते हुए राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर और बूंदी जैसे क्षेत्रों को मराठा शासन का हिस्सा दिखाया गया था। स्थानीय इतिहासकारों, राजपरिवार के सदस्यों और राजपूत संगठनों ने कहा था कि यह नक्शा ऐतिहासिक रूप से गलत और भ्रामक है, क्योंकि इन रियासतों पर मराठाओं का सीधा नियंत्रण या शासन स्थापित नहीं हुआ था। ऐसे आरोपों के बाद NCERT ने नक्शा हटाने का फैसला किया।
जैसलमेर के पूर्व महारावल चैतन्यराज सिंह और अन्य इतिहासकारों ने विशेष रूप से यह तर्क रखा कि जैसलमेर को मराठा क्षेत्र में दिखाना इतिहास और स्थानीय पहचान की गलत प्रस्तुति है। उन्होंने कहा कि मराठा साम्राज्य का प्रभाव सीमित रहा और जैसलमेर ने उन दौरों में स्वतंत्रता बनाए रखी थी। इन आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए NCERT ने नक्शे को हटाने का निर्णय लिया।
इस कदम की प्रतिक्रिया दो तरफ से सामने आई है। राजस्थान में इतिहास की सटीकता और स्थानीय पहचान की रक्षा को महत्व देते हुए नक्शा हटाने का स्वागत हुआ है, वहीं कुछ इतिहासकारों ने तर्क किया है कि मराठाओं की भूमिका और प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में अलग‑अलग समय पर रहा, और नक्शों पर सीमाओं का इतिहास हमेशा स्पष्ट नहीं होता। इस बहस ने यह संकेत दिया है कि पाठ्यपुस्तक में इतिहास के चित्रण को लेकर संवेदनशीलता और तथ्यपरकता दोनों का ध्यान रखना आवश्यक है।
NCERT ने कहा है कि यह हटाया गया नक्शा आगे की अपडेटेड संस्करणों में संशोधित रूप में शामिल किया जा सकता है और पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अधिक शोध और विशेषज्ञ समीक्षा की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस मुद्दे ने यह भी उजागर किया है कि शिक्षा सामग्री में इतिहास की प्रस्तुति पर स्थानीय समुदायों और विद्वानों की अपेक्षाएँ कितनी महत्वपूर्ण हैं और भविष्य में ऐसी सामग्री को तैयार करने में और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
यह घटना इतिहास की शिक्षा में सामग्री की सटीकता और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों के बीच संतुलन को लेकर चल रहे बड़े विवाद का एक हिस्सा भी मानी जा रही है, जो शिक्षा व्यवस्था के भीतर व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है।

