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सांसद राजकुमार रोत की आवाज संसद में गूँजी: बांसवाड़ा‑रतलाम रेल परियोजना पर उठाए कई गंभीर सवाल

सांसद राजकुमार रोत की आवाज संसद में गूँजी: बांसवाड़ा‑रतलाम रेल परियोजना पर उठाए कई गंभीर सवाल

राजस्थान के डूंगरपुर‑बांसवाड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद राजकुमार रोत की आवाज ने संसद में जोरदार गूँज उठी, जब उन्होंने क्षेत्र की सबसे पुरानी एवं लंबे समय से लंबित बांसवाड़ा‑डूंगरपुर‑रतलाम रेल परियोजना को जल्द पूरा करने की मांग तथा रेल संचार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। रोत ने यह मुद्दा हाल ही में लोकसभा के सत्र में उठाया, जिससे केंद्रीय स्तर पर भी इस परियोजना और क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर बहस शुरू हो गई है।

सांसद रोत ने कहा कि यह रेलवे लाइन वर्ष 2012 में स्वीकृत होने के बावजूद करीब 13‑14 साल बाद भी अधूरा पड़ा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस क्षेत्र को लगातार समर्थन देने वाले लोगों ने 2014 और 2019 के चुनावों में मजबूत समर्थन दिया, वहाँ आज तक बुनियादी संपर्क सुविधाएँ क्यों नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने यह मुद्दा विशेष रूप से आदिवासी जनसंख्या वाले क्षेत्रों के विकास के संदर्भ में उठाया।

रोत ने विधानसभा में यह भी कहा कि बांसवाड़ा आज भी वह जिला है जहां रेल सुविधा नहीं पहुंची है, जबकि अन्य जिलों में बेहतर ट्रेन सेवा उपलब्ध है। उन्होंने वंदे भारत एक्सप्रेस की टिकट दर पर भी अपनी आपत्ति जताई। रोत ने बताया कि डूंगरपुर से अहमदाबाद तक वंदे भारत का किराया लगभग 690 रुपये है, जबकि सामान्य ट्रेनों में वही दूरी 60‑70 रुपये में तय की जा सकती है। उन्होंने इसे गरीब, मजदूर और आदिवासी वर्ग के लिए आर्थिक रूप से बोझ बताया और किराये को कम करने की मांग की।

सांसद रोत ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी के लिए न सिर्फ रेल लाइन का पूरा होना जरूरी है, बल्कि डूंगरपुर से दिल्ली और मुंबई तक सीधा रेल कनेक्शन भी आवश्यक है। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि उदयपुर‑बांद्रा ट्रेन को डूंगरपुर के रास्ते चलाया जाए और एसरवा‑जयपुर एक्सप्रेस में डूंगरपुर‑उदयपुर के बीच अतिरिक्त जनरल डिब्बे जोड़े जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि डूंगरपुर रेलवे स्टेशन पर एक्सलेटर (पर्यटक व यात्री सुविधा के लिए चलने वाली ट्रैवलर) लगाए जाएँ ताकि यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने में आसानी हो।

रोत ने ‌सरकार से यह भी आग्रह किया कि स्थानीय मांगों पर काम किया जाए, जैसे बिछीवाड़ा स्टेशन पर ठहराव देना, नयी डेमो ट्रेनों की शुरुआत, तथा अहमदाबाद‑उदयपुर‑डूंगरपुर से मुंबई तक चलने वाली ट्रेन सेवाओं को शुरू करना। इसके अलावा उन्होंने डूंगरपुर स्टेशन का नाम आदिवासी योद्धा डूंगर बरंडा भील के नाम पर रखने की भी मांग की।

सांसद ने कहा कि नई रेल लाइनों की घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए पहले लंबित परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण के समय उचित मुआवजे और स्थानीय हितों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। रोत का कहना था कि बिना बुनियादी संपर्क सुविधा के क्षेत्र के विकास की उम्मीद करना मुश्किल है।

इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए संसद में चर्चा से जुड़े राजनीतिक दलों, मीडिया और क्षेत्रीय नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। भाजपा सरकार से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों ही परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी और भूमि अधिग्रहण जैसी बाधाओं के कारण कार्य में विलंब हो रहा है। वहीं क्षेत्रीय विकास कार्यकर्ताओं ने कहा कि सांसद द्वारा उठाये गए मुद्दे से प्रशासनिक और नीति‑निर्माण स्तर पर ध्यान आकर्षित होगा, जिससे आने वाले बजट में मजबूती के साथ संसाधन मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

यह चर्चा बांसवाड़ा‑डूंगरपुर‑रतलाम रेल परियोजना जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर मुद्दों पर स्थानीय सांसद और संसद के बीच सीधा संवाद स्थापित करती है। क्षेत्र की जनसंख्या अब उम्मीद कर रही है कि जल्द ही रेल सेवा, बेहतर ट्रेन सुविधा और कम किराया जैसी मांगों पर विकास कार्य तेज गति से शुरू होंगे।

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