राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, आषाढ़ में बारिश ने तोड़ा उम्मीदों का साथ; 12 जिलों में सूखे जैसे हालात
राजस्थान में मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना आषाढ़ उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। प्रदेश में इस बार मानसून की शुरुआत कमजोर रही और अब तक हुई बारिश के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले साल जहां आषाढ़ माह में 329.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, वहीं इस साल अब तक केवल 172 मिमी बारिश हुई है। यह सामान्य औसत से 8.01 प्रतिशत कम है।
बारिश की कमी का असर अब प्रदेश के कई जिलों में साफ दिखाई देने लगा है। खेती-किसानी से लेकर जलाशयों और पेयजल व्यवस्था तक पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कमजोर रही मानसून की शुरुआत
इस बार मानसून ने राजस्थान में अपेक्षाकृत धीमी शुरुआत की। शुरुआती दौर में बारिश का इंतजार लंबा खिंच गया और करीब दो सप्ताह तक मानसून लगभग निष्क्रिय बना रहा। बाद में कुछ क्षेत्रों में बारिश जरूर हुई, लेकिन पूरे प्रदेश में इसका समान असर देखने को नहीं मिला।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसूनी गतिविधियां सक्रिय होने के बावजूद वर्षा का वितरण असमान रहा, जिसके कारण अधिकांश जिले सामान्य बारिश से वंचित रह गए।
सिर्फ 5 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
अब तक के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के केवल 5 जिलों में ही औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत 27 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जबकि 12 जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ गई है। खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी बढ़वार बारिश पर निर्भर होती है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
खेती और जल संसाधनों पर बढ़ी चिंता
बारिश की कमी का असर खेतों के साथ-साथ जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर पर भी पड़ सकता है। कई इलाकों में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई पूरी हो सके और फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के अंतिम दिनों और अगस्त की शुरुआत में अच्छी बारिश नहीं हुई तो प्रदेश के कई हिस्सों में जल संकट और कृषि संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
मौसम विभाग की नजर अगले सिस्टम पर
मौसम विभाग लगातार मानसूनी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि नया मौसम तंत्र सक्रिय होता है तो कई जिलों में अच्छी बारिश की संभावना बन सकती है। इससे वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।फिलहाल प्रदेश के किसान, आमजन और प्रशासन सभी की निगाहें आगामी बारिश पर टिकी हैं। यदि मानसून जल्द रफ्तार नहीं पकड़ता है तो आषाढ़ में हुई बारिश की कमी का असर पूरे खरीफ सीजन और जल संसाधनों पर देखने को मिल सकता है।

