उदयपुर संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा विधायक प्रताप गमेती ने डिप्टी सीएम दिया कुमारी के सामने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “आंगनबाड़ियों में मिलने वाले पोषण आहार को जानवर तक नहीं खाते।”
बैठक में उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को जो पोषण आहार दिया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। विधायक ने कहा कि कई जगहों पर लोग यह आहार घर ले जाकर फेंक देते हैं, जिससे योजना की उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह बयान सामने आने के बाद आंगनबाड़ी सेवाओं और पोषण कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर बहस तेज हो गई है। विधायक गमेती ने मांग की कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आहार की गुणवत्ता की जांच कराए और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए।
बैठक में मौजूद अधिकारियों के अनुसार, इस मुद्दे पर विभागीय स्तर पर समीक्षा करने और गुणवत्ता सुधार के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही गई है। डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने भी मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों को जांच के निर्देश देने के संकेत दिए।
पोषण आहार योजनाएं विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर चलाई जाती हैं। ऐसे में यदि गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पोषण आहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि आपूर्ति श्रृंखला या निर्माण प्रक्रिया में कहीं भी लापरवाही होती है, तो इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
वहीं, इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि पोषण आहार की स्थिति इतनी खराब है, तो यह सरकारी योजनाओं की निगरानी पर सवाल खड़ा करता है।
फिलहाल इस मुद्दे ने प्रशासन और सरकार दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं और पोषण आहार की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

