डिस्कॉम ऑफिस में धरने पर बैठे विधायक रविंद्र सिंह भाटी, बोले- लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई तक यहीं रहूंगा
राजस्थान में बिजली से जुड़ी समस्याओं और कर्मचारियों की कथित लापरवाही को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने डिस्कॉम कार्यालय में धरना दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वह कार्यालय से नहीं उठेंगे। विधायक के धरने पर बैठने से बिजली विभाग में हलचल बढ़ गई और मामले में कार्रवाई को लेकर दबाव बन गया।
कार्रवाई की मांग पर अड़े विधायक
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बिजली विभाग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा।
भाटी ने अपने रुख से साफ कर दिया कि वह केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि मामले में कार्रवाई चाहते हैं। उनके इस कदम के बाद डिस्कॉम अधिकारियों के सामने शिकायतों का समाधान करने और स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है।
करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसा कर्मचारी
मामला बाड़मेर जिले के शिव क्षेत्र में बिजली लाइन का फॉल्ट ठीक करने के दौरान हुए हादसे से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 30 वर्षीय एफआरटी कर्मचारी लक्ष्मणदास बिजली के करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। उसका अस्पताल में उपचार जारी है।
घायल कर्मचारी के पिता ने आरोप लगाया कि लाइन पर काम चलने के दौरान जीएसएस से बिजली सप्लाई चालू कर दी गई थी। उनका आरोप है कि संबंधित कर्मचारी नशे की हालत में था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के नतीजे सामने आना बाकी हैं।
एफआईआर, निलंबन और मुआवजे की मांग
विधायक भाटी घायल कर्मचारी के परिजनों और समर्थकों के साथ बाड़मेर स्थित डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता कार्यालय पहुंचे और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। उन्होंने मांग की कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद शिव क्षेत्र में विरोध भी हुआ और बाजार बंद रखा गया। धरने के बाद पुलिस तथा बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया।
कार्रवाई होने तक धरना जारी रखने की चेतावनी
भाटी ने स्पष्ट किया कि जब तक जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और पीड़ित को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। अब मामले में विभागीय जांच, संभावित कानूनी कार्रवाई और घायल कर्मचारी के उपचार को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
फिलहाल, हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। विभाग की ओर से जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

