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ब्यावर में खनन माफिया का दुस्साहस, ड्रोन सर्वे टीम पर जानलेवा हमला, तकनीकी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर

ब्यावर में खनन माफिया का दुस्साहस: ड्रोन सर्वे टीम पर जानलेवा हमला, तकनीकी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर

प्रदेश में खनन माफिया का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। सावर में हाल ही में होमगार्ड की हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि ब्यावर जिले के अतीतमंड गांव में खनन विभाग की ड्रोन सर्वे टीम पर जानलेवा हमला कर दिया गया। इस हमले के बाद खान एवं भू-विज्ञान विभाग के तकनीकी कर्मचारी सोमवार को सामूहिक अवकाश पर चले गए, जिससे विभागीय कार्य ठप हो गया।

जानकारी के अनुसार, अतीतमंड गांव में खनन विभाग की टीम ड्रोन सर्वे कर रही थी, ताकि अवैध खनन गतिविधियों का पता लगाया जा सके। इसी दौरान कुछ अज्ञात हमलावरों ने टीम पर हमला किया। हमले में कोई बड़ा नुकसान टल गया, लेकिन कर्मचारियों में डर और आक्रोश पैदा हो गया। इस आक्रोश के चलते विभागीय कर्मचारी अवकाश पर चले गए और उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि खनन माफिया लगातार अवैध खनन को अंजाम दे रहा है और अधिकारियों की जांच में बाधा डाल रहा है। इससे विभागीय कर्मचारियों का कामकाज प्रभावित हो रहा है और खनन नियमों का पालन करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। अधिकारी ने कहा कि हमले के मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जिम्मेदारों को जल्द गिरफ्तार करने की प्रक्रिया चल रही है।

सावर में हाल ही में हुई होमगार्ड की हत्या ने पहले ही खनन माफिया की साहसिक और हिंसक प्रवृत्ति को उजागर किया था। अब ब्यावर में हुए हमले ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने अलर्ट जारी कर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है।

खनन और भू-विज्ञान विभाग के कर्मचारी संघ ने कहा कि अवकाश का फैसला सुरक्षा के कारण लिया गया है। उन्होंने मांग की है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासन अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करें। कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो लंबे समय तक विभागीय कार्य प्रभावित रह सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान में खनन माफिया का लगातार दुस्साहस बढ़ना चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में प्रशासन, पुलिस और विभागीय कर्मचारियों के बीच समन्वय और सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हैं। इसके अलावा अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई भी आवश्यक है।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि खनन माफिया के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होने से अपराधी और अधिक साहसी हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन और राज्य सरकार से अपील की है कि खनन क्षेत्र में कानून का शासन स्थापित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएँ।

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