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मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर: LPG सिलेंडर के दामों में बड़ी बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर: LPG सिलेंडर के दामों में बड़ी बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष का सीधा असर आज से देश की रसोई पर महसूस किया जा रहा है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने शनिवार, 7 मार्च 2026 से एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी लागू कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद घरेलू और व्यावसायिक उपयोग दोनों के सिलेंडरों के दामों में इजाफा हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बिना सब्सिडी वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम में ₹60 की वृद्धि की गई है। वहीं, व्यावसायिक (कमर्शियल) सिलेंडर की कीमत ₹114.5 बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी का असर आम जनता की जेब पर सीधे पड़ेगा और घरेलू खर्चों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन और गैस की कीमतों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि तेल और गैस के आयात पर निर्भर देशों में ऐसी स्थितियाँ आम होती हैं, जिससे घरेलू बाजार में महंगाई और रसोई गैस की कीमतें बढ़ती हैं।

गृहिणियों और छोटे व्यवसायियों में इस बढ़ोतरी को लेकर चिंता का माहौल है। स्थानीय दुकानदारों और सिलेंडर वितरकों का कहना है कि पहले ही गैस सिलेंडर महंगे थे, और अब कीमतों में इजाफे से लोगों को घरेलू बजट में फेरबदल करना पड़ेगा। छोटे होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंट्स के लिए यह बढ़ोतरी विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें व्यावसायिक सिलेंडरों पर अधिक खर्च करना होगा।

सरकार ने कहा है कि यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते जरूरी थी। अधिकारियों ने आम जनता से यह अपेक्षा जताई है कि सदस्य और व्यवसायी इस समय संयमित खर्च करें और सिलेंडर की आपूर्ति में किसी भी तरह की अनियमितता न होने दें।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि जनता को ऊर्जा बचत और विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि रसोई में गैस का कुशल उपयोग, बड़े सिलेंडर का सामूहिक उपयोग और ऊर्जा-बचत उपकरणों का इस्तेमाल। इससे बढ़ती कीमतों का बोझ कम किया जा सकता है।

देशभर में LPG का इस्तेमाल करोड़ों घरों में होता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 35 करोड़ घरेलू रसोई गैस उपभोक्ता हैं और व्यावसायिक सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, ढाबा और छोटे उद्योगों में होता है। इसलिए इस बढ़ोतरी का असर व्यापक होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में यदि मिडिल ईस्ट का संकट जारी रहा, तो एलपीजी और पेट्रोल-डीजल जैसी ऊर्जा की कीमतों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। आम जनता को इस स्थिति के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना होगा।

इस तरह, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का पहला सीधा असर आज देश की रसोई पर देखने को मिला है। एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतें आम घरों और छोटे व्यवसायों के लिए नई आर्थिक चुनौती पेश कर रही हैं।

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