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मेडिकेटेड नशा बना बड़ी चिंता, डोडा पोस्त से कम लेकिन दवाइयों के दुरुपयोग से बढ़ीं मौतें: विधायक विनोद कुमार

मेडिकेटेड नशा बना बड़ी चिंता, डोडा पोस्त से कम लेकिन दवाइयों के दुरुपयोग से बढ़ीं मौतें: विधायक विनोद कुमार

क्षेत्र में बढ़ते नशे के प्रचलन को लेकर पीलीबंगा विधायक विनोद कुमार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से 2025 के बीच डोडा पोस्त के सेवन से मौत के केवल दो मामले ही सामने आए हैं, जबकि मेडिकेटेड नशे के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। यह स्थिति समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंताजनक है।

विधायक विनोद कुमार ने कहा कि पारंपरिक नशे की तुलना में अब युवाओं में दवाइयों के दुरुपयोग की प्रवृत्ति अधिक देखने को मिल रही है। मेडिकल स्टोर से आसानी से उपलब्ध कुछ दवाओं का गलत तरीके से सेवन कर युवा अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि कई मामलों में मौत तक हो रही है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो डोडा पोस्त से संबंधित मौतों के मामले बेहद कम हैं, लेकिन मेडिकेटेड नशे के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यह संकेत है कि नशे का स्वरूप बदल रहा है और इसे रोकने के लिए नई रणनीति की जरूरत है।

विधायक ने कहा कि नशा समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है। खासकर किशोर और युवा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है, जिससे परिवार और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत परामर्श लें।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टोर पर दवाइयों की बिक्री पर सख्त निगरानी रखी जाए। बिना डॉक्टर की पर्ची के नशीली दवाओं की बिक्री पर कड़ाई से रोक लगाई जाए। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकेटेड नशा शरीर पर धीमा लेकिन घातक प्रभाव डालता है। लंबे समय तक सेवन से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे में समय रहते रोकथाम और उपचार बेहद जरूरी है।

स्पष्ट है कि नशे के बदलते स्वरूप ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब जरूरत है समाज, प्रशासन और परिवारों के सामूहिक प्रयासों की, ताकि युवाओं को इस दलदल से बचाया जा सके और एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।

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