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Bhilwara अफीम उत्पादन का नाप पूरा, भीलवाड़ा व चित्ताैड़गढ़ जिले की 6 तहसीलों के 577.36 हैक्टेयर में की बुआई

Bhilwara अफीम उत्पादन का नाप पूरा, भीलवाड़ा व चित्ताैड़गढ़ जिले की 6 तहसीलों के 577.36 हैक्टेयर में की बुआई

भीलवाड़ा न्यूज़ डेस्क, जिला अफीम विभाग ने भीलवाड़ा खंड की भीलवाड़ा व चित्ताैड़गढ़ जिले की 6 तहसीलाें में अफीम की फसल का नाप गुरुवार काे पूरा कर लिया। भीलवाड़ा खंड में सबसे अधिक चित्ताैड़गढ़ जिले की बेगूं तहसील में 390 हैक्टेयर में फसल की बुआई की गई। पहली बार सीपीएस पद्धति से करीब चार दर्जन किसान अफीम बाेएंगे जाे चीरा लगाने की बजाय डाेडे बेचेंगे। भीलवाड़ा खंड के चित्ताैड़ व भीलवाड़ा जिले की 6 तहसीलाें में 251 गावाें के 5637 किसानाें काे इस बार अफीम के पट्टे जारी हुए थे। इन्हाेंने कुल 577.36 हैक्टेयर में बुआई की है।

जिला अफीम विभाग ने पिछले दिनाें चित्ताैड़गढ़ व भीलवाड़ा जिले की 6 तहसीलाें के 251 गावाें के 5637 किसानाें काे अफीम की खेती के लिए पट्टे दिए। किसानाें ने 5, 6,10 व 12 आरी क्षेत्रफल में करीब 577.36 हेक्टेयर में अफीम की बुआई की गई।

जिसका जिला अफीम विभाग ने 31 दिसंबर से मेजरमेंट कार्य शुरू किया, जाे गुरुवार काे पूरा कर लिया गया। करीब 21 दिवसीय मेजरमेंट कार्य काे नारकाेटिक्स विभाग की 30 टीमाें ने पूरा किया। इस टीम में एक प्रभारी व एक असिस्टेंट काे लगाया गया था। मेजरमेंट के अंतिम चरण का कार्य बेगूं तहसील में किया गया। भीलवाड़ा खंड में सबसे अधिक बेगूं तहसील के 4755 किसानाें ने 390 हेक्टेयर में अफीम की बुआई की है।

भीलवाड़ा खंड में इस बार चित्ताैड़गढ़ व भीलवाड़ा जिले की 6 तहसीलाें चित्ताैड़गढ़ की बेगू व रावतभाटा तथा भीलवाड़ा जिले की काेटड़ी, मांडलगढ़, जहाजपुर व बिजाैलिया तहसीलाें के किसानाें काे अफीम की खेती के लिए पट्टे दिए गए थे। पहली बार सरकार के सीपीएस पद्धति लागू किए जाने से भीलवाड़ा खंड के करीब 48 किसान डाेडाें पर चीरा लगाने के बजाय संबंधित लाइसेंसी काे बेचेंगे।

दाेनाें जिलाें के सबसे अधिक 4291 किसानाें काे 10 आरी के तथा सबसे कम 60 किसानाें काे 5 आरी के पट्टे दिए गए। सबसे अधिक बेगू तहसील के 126 गावों के 3755 किसानों को अफीम की खेती के पट्टे मिले। जिला अफीम अधिकारी के एल छापरिया का कहना हैं भीलवाड़ा खंड की 6 तहसीलाें में की गई अफीम की फसल की बुआई का मेजरमेंट पूरा कर लिया गया है। इस साल फसल अच्छी है। बुआई के बाद व बीच में बारिश हाेना भी फसल के लिए फायदेमंद साबित हुआ है।

राजस्थान न्यूज़ डेस्क !!!

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