विशेष कार्य बल (SOG) की जांच में पेट्रोलियम पाइपलाइन से कच्चे तेल की संगठित चोरी के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से लंबे समय से सक्रिय था और इसमें कई स्तरों पर लोगों की संलिप्तता हो सकती है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाइपलाइन से तेल की अवैध निकासी के लिए तकनीकी तरीके अपनाए जा रहे थे, ताकि सामान्य निगरानी में इसका पता न चल सके। चोरी किए गए कच्चे तेल को अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाकर खपाने की कोशिश की जाती थी।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में केवल स्थानीय स्तर के लोग ही नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह के शामिल होने की आशंका है, जो पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर रहा था। SOG अब इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, परिवहन व्यवस्था और सप्लाई चैन की गहन जांच कर रही है।
राजस्थान पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कई संदिग्धों से पूछताछ शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में डिजिटल साक्ष्य, लोकेशन डेटा और ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड की मदद ली जा रही है, ताकि पूरे गिरोह का खुलासा किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की संगठित चोरी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक व्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।
जांच एजेंसियों ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि इस नेटवर्क की जड़ें कई जिलों तक फैली हो सकती हैं। फिलहाल पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है और उच्च स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।

