राजस्थान के हिस्से के पानी में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा, पंजाब रोजाना 1800 क्यूसेक पानी कम दे रहा था; तीन राज्यों की कमेटी ने पकड़ी चोरी
राजस्थान के हिस्से के पानी को लेकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच में पता चला है कि पंजाब रोजाना राजस्थान को करीब 1800 क्यूसेक पानी कम दे रहा था। हैरानी की बात यह है कि पंजाब की गेज में पानी की पूरी मात्रा दर्ज हो रही थी, लेकिन धरातल पर राजस्थान तक कम पानी पहुंच रहा था। तीन राज्यों की कमेटी ने इस गड़बड़ी को पकड़ा है। इस खुलासे के बाद राजस्थान के हिस्से के पानी की निगरानी और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस नहर के जरिए प्रदेश के कई इलाकों में सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए पानी पहुंचाया जाता है। ऐसे में तय मात्रा से कम पानी मिलने का सीधा असर जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। खासकर नहर पर निर्भर क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति का सही हिसाब रखना जरूरी है।
गेज में पूरी मात्रा, लेकिन राजस्थान तक कम पहुंचा पानी
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, पंजाब की ओर से दर्ज की जा रही गेज रीडिंग और राजस्थान को वास्तव में मिल रहे पानी की मात्रा में अंतर था। गेज में निर्धारित मात्रा के अनुसार पानी दर्ज हो रहा था, लेकिन वास्तविक स्थिति में राजस्थान को रोजाना लगभग 1800 क्यूसेक पानी कम मिल रहा था।
इस अंतर के कारण पानी की वास्तविक आपूर्ति और रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों के बीच बड़ा फर्क सामने आया। तीन राज्यों की कमेटी ने इसी अंतर की जांच की और गड़बड़ी का पता लगाया। इससे यह सवाल भी उठा कि जब गेज में पूरी मात्रा दर्ज थी, तो पानी राजस्थान तक पहुंचने से पहले कहां कम हो रहा था।
तीन राज्यों की कमेटी ने की जांच
पानी के बंटवारे और उसकी वास्तविक आपूर्ति की स्थिति की जांच के लिए तीन राज्यों की कमेटी ने पड़ताल की। जांच के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज पानी की मात्रा और धरातल पर उपलब्ध पानी के बीच अंतर सामने आया। कमेटी ने पाया कि राजस्थान को रोजाना करीब 1800 क्यूसेक पानी कम मिल रहा था।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराज्यीय नदियों और नहरों के पानी का बंटवारा निर्धारित व्यवस्था के तहत होता है। इसमें हर राज्य को उसके हिस्से के अनुसार पानी मिलना जरूरी है। यदि रिकॉर्ड में पूरी मात्रा दर्ज हो और वास्तविक आपूर्ति कम हो, तो वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता प्रभावित होती है।
राजस्थान के जल प्रबंधन पर पड़ सकता है असर
रोजाना 1800 क्यूसेक पानी की कमी का मामला सामने आने से राजस्थान के जल प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ गई है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना पर निर्भर इलाकों में पानी की उपलब्धता का सीधा संबंध निर्धारित आपूर्ति से है। ऐसे में वास्तविक मात्रा और रिकॉर्ड का मिलान करना जरूरी हो जाता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि पानी कम मिलने की वजह क्या थी, यह गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी और अब इसकी भरपाई किस तरह की जाएगी। साथ ही, पंजाब की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल तीन राज्यों की कमेटी की जांच में सामने आया यह खुलासा राजस्थान के हिस्से के पानी की निगरानी व्यवस्था को लेकर अहम सवाल खड़े करता है।

