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आरजीएचएस में बडा फर्जीवाड़ा, वीडियो में जानें 6 फार्मा स्टोर पर कार्रवाई, 14 कर्मचारी सस्पेंड, फर्जी बिल बनाकर रकम उठाई

आरजीएचएस में बडा फर्जीवाड़ा, वीडियो में जानें 6 फार्मा स्टोर पर कार्रवाई, 14 कर्मचारी सस्पेंड, फर्जी बिल बनाकर रकम उठाई

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि योजना के तहत फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये की रकम उठाई गई। इस मामले में अब तक 6 फार्मा स्टोर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है, जबकि 14 सरकारी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। पूरे मामले से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें फर्जीवाड़े की परतें खुलती नजर आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार, बीते एक सप्ताह में स्वास्थ्य विभाग ने आरजीएचएस के तहत अनियमितता करने वाले 6 फार्मा स्टोर को चिन्हित किया। इनमें से 4 फार्मा स्टोर पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है, जबकि 2 फार्मा स्टोर को योजना से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि कुछ फार्मा स्टोर संचालकों ने बाजार से दवाइयां और इंजेक्शन खरीदे ही नहीं, लेकिन आरजीएचएस के नाम पर मरीजों को दवा देने का दावा करते हुए फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठा लिया।

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी (RSHAA) के सीईओ हरजीलाल अटल ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा योजनाबद्ध तरीके से किया गया। उन्होंने कहा कि आरजीएचएस जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है और आगे भी जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा।

इस फर्जीवाड़े में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आई है। पहले की जांचों में दोषी पाए जाने पर पुलिस विभाग के 4 और आयुर्वेद विभाग के 10 कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है। इस तरह कुल 14 कर्मचारियों पर गाज गिरी है। विभाग का मानना है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इस तरह की गड़बड़ी संभव नहीं है।

वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह कागजों में दवाइयों की आपूर्ति दर्शाकर भुगतान लिया गया, जबकि वास्तविकता में मरीजों को दवाइयां दी ही नहीं गईं। इस खुलासे के बाद आरजीएचएस की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में और फार्मा स्टोर, अस्पताल और कर्मचारियों की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ी तो रिकवरी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार का कहना है कि आरजीएचएस का लाभ केवल जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

फिलहाल यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जानना चाहते हैं कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल है। जांच पूरी होने के बाद और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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