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अशोक गहलोत के बयान पर मदन राठौड़ का पलटवार: वीडियो में जाने ‘एक पेड़ कटता है तो 20 लगाने पड़ते हैं, पर्यावरण को नुकसान कहां?’

अशोक गहलोत के बयान पर मदन राठौड़ का पलटवार: वीडियो में जाने ‘एक पेड़ कटता है तो 20 लगाने पड़ते हैं, पर्यावरण को नुकसान कहां?’

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजस्थान की राजनीति में पर्यावरण और विकास को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष Madan Rathore ने पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot के पेड़ कटाई संबंधी बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत स्वयं लंबे समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें यह अच्छी तरह पता है कि सरकार किसी भी परियोजना के लिए पेड़ काटने की अनुमति बिना शर्त नहीं देती। उन्होंने कहा कि यदि किसी विकास कार्य के लिए एक पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले में 20 नए पेड़ लगाने की अनिवार्यता होती है।

‘विकास भी जरूरी, पर्यावरण भी’

राठौड़ ने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है कि विकास कार्य रुकने नहीं चाहिए, लेकिन साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य से पेड़ कटाई की अनुमति सख्त नियमों और शर्तों के साथ दी जाती है।उन्होंने कहा कि जिन लोगों या एजेंसियों को पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है, उन्हें निर्धारित संख्या में नए पौधे लगाने होते हैं। इसके अलावा संबंधित एजेंसी को यह प्रमाणित भी करना होता है कि लगाए गए पौधे जीवित हैं और उनकी देखभाल की जा रही है।

‘20 गुना पौधारोपण का नियम’

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि पेड़ कटाई की अनुमति लेने वाले व्यक्ति या संस्था को 20 गुना पौधारोपण का प्रमाण पत्र देना पड़ता है। इतना ही नहीं, पौधों को जीवित रखना भी उनकी जिम्मेदारी होती है।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब एक पेड़ के बदले 20 पेड़ लगाए जा रहे हैं और उनकी निगरानी भी की जा रही है, तो इसमें पर्यावरण को नुकसान कहां हो रहा है?”

पर्यावरण दिवस पर छिड़ी बहस

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य में विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां बड़े पैमाने पर पेड़ कटने को पर्यावरण के लिए खतरा बता रहा है, वहीं भाजपा का कहना है कि सरकार पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है।राठौड़ ने दावा किया कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और विकास तथा हरित संतुलन दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रही है।

पर्यावरण और विकास के संतुलन पर जोर

राजनीतिक बयानबाजी के बीच पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि विकास परियोजनाओं के साथ व्यापक स्तर पर पौधारोपण और उनकी नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।फिलहाल, विश्व पर्यावरण दिवस पर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस राज्य में विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।

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