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मदन राठौड़ का सोनिया गांधी पर बड़ा दावा, वीडियो में बोले- ‘पहले मतदाता बनीं, बाद में नागरिक’; SIR को लेकर कांग्रेस पर निशाना

मदन राठौड़ का सोनिया गांधी पर बड़ा दावा, वीडियो में बोले- ‘पहले मतदाता बनीं, बाद में नागरिक’; SIR को लेकर कांग्रेस पर निशाना

राजस्थान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस और विपक्ष के एसआईआर (Special Intensive Revision) विरोधी अभियान पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी की नागरिकता और मतदाता सूची में उनके नाम को लेकर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को जयपुर स्थित बीजेपी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान राठौड़ ने दावा किया कि सोनिया गांधी भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता बन गई थीं।  राठौड़ ने कहा कि अगर उस समय एसआईआर जैसी प्रक्रिया लागू होती तो सोनिया गांधी मतदाता नहीं बन पातीं। उन्होंने इसी संदर्भ में इसे ‘वोट चोरी’ बताया और कहा कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची का सत्यापन और शुद्धिकरण किया जा रहा है।

‘पहले मतदाता, बाद में नागरिक’ होने का दावा

मदन राठौड़ ने कहा कि सोनिया गांधी की भारतीय नागरिकता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उनके मुताबिक, सोनिया गांधी राजीव गांधी से शादी के बाद भारतीय नागरिक बनीं, जबकि उनका नाम इससे पहले मतदाता सूची में शामिल होने का दावा किया जाता है। राठौड़ ने कहा कि यदि उस समय एसआईआर होता तो ऐसी स्थिति में उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं था, तो वह पहले मतदाता कैसे बन सकता था।

SIR को लेकर विपक्ष पर पलटवार

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल देश में चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष एसआईआर की प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित तौर पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहा है। वहीं चुनाव आयोग ने पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर न रहने देने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। राठौड़ ने विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को व्यवस्थित और सत्यापित करना है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने और पात्रता से जुड़े तकनीकी मामलों का निर्णय चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत होता है। 

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा SIR विवाद

एसआईआर को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। विपक्षी दल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और एसआईआर को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं। दूसरी ओर बीजेपी नेता विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मतदाता सूची के सत्यापन को जरूरी बता रहे हैं।

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