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रेगिस्तान में तैयार हो रहे नन्हे गोडावण, वीडियो में जाने 9.25 करोड़ की रिवाइल्डिंग टनल में सीख रहे जंगल में जीना

रेगिस्तान में तैयार हो रहे नन्हे गोडावण, वीडियो में जाने 9.25 करोड़ की रिवाइल्डिंग टनल में सीख रहे जंगल में जीना

 

जैसलमेर के रामदेवरा स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में इन दिनों ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण के नन्हे चूजों को खुले जंगल में जीवन बिताने के लिए तैयार किया जा रहा है। महज दो महीने की उम्र के ये चूजे अब इंसानी देखरेख से धीरे-धीरे दूर होकर प्राकृतिक परिस्थितियों में खुद जीवित रहना सीख रहे हैं। इसके लिए सेंटर में 9.25 करोड़ रुपये की लागत से विशेष रिवाइल्डिंग टनल तैयार की गई है, जहां रेगिस्तान के जंगल जैसा माहौल बनाया गया है।

इस रिवाइल्डिंग टनल में तीन गोडावण चूजों को करीब एक महीने पहले लाया गया था। उस समय उनकी उम्र महज एक महीना थी। अब ये चूजे दो महीने के हो चुके हैं और प्राकृतिक वातावरण में रहने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। इनका उद्देश्य भविष्य में उन्हें खुले जंगल में सुरक्षित तरीके से छोड़ना है, ताकि वे इंसानों पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार जीवन जी सकें।

टनल में चूजों के लिए बिल्कुल ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जैसा उन्हें जंगल और रेगिस्तान में मिलने वाला है। यहां प्राकृतिक झाड़ियां, घास और छोटे पेड़-पौधे लगाए गए हैं। चूजों को तेज धूप और गर्मी से बचाने के लिए छायादार हिस्से और प्राकृतिक शेड भी बनाए गए हैं। इससे उन्हें धीरे-धीरे रेगिस्तानी मौसम की परिस्थितियों के अनुकूल होने का मौका मिल रहा है।

रिवाइल्डिंग के दौरान चूजे खुद भोजन और पानी तलाशने की आदत विकसित कर रहे हैं। मिट्टी कुरेदकर कीड़े ढूंढना और उन्हें खाना उनके प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खतरा महसूस होने पर झाड़ियों में छिपना भी वे सीख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल में रहने वाले गोडावण के लिए इस तरह के प्राकृतिक व्यवहार बेहद जरूरी होते हैं।

टनल में पानी की भी विशेष व्यवस्था की गई है। दो अलग-अलग स्थानों पर पानी के स्रोत बनाए गए हैं, जहां चूजे अपनी जरूरत के अनुसार खुद पहुंचकर पानी पीते हैं। इसका मकसद उन्हें इस तरह तैयार करना है कि भविष्य में खुले वातावरण में उन्हें पानी के लिए इंसानों पर निर्भर न रहना पड़े।

गोडावण राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की पहचान माना जाता है और यह बेहद दुर्लभ पक्षियों में शामिल है। इसकी संख्या बढ़ाने और प्रजाति को बचाने के लिए लंबे समय से संरक्षण और ब्रीडिंग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर इसी संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रिवाइल्डिंग टनल में चूजों को रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें सुरक्षित माहौल में प्राकृतिक जीवन की आदत डाली जा रही है। यहां उन्हें भोजन तलाशने, मौसम का सामना करने, खतरे से बचने और पानी तक खुद पहुंचने जैसी जरूरी गतिविधियां सीखने का अवसर मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जंगली पक्षी को सीधे इंसानी देखरेख से निकालकर खुले जंगल में छोड़ना आसान नहीं होता। यदि पक्षी प्राकृतिक परिस्थितियों में खुद भोजन और पानी तलाशना नहीं सीखता तो उसके जंगल में जीवित रहने की संभावना कम हो सकती है। इसी वजह से गोडावण के इन नन्हे चूजों को चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार किया जा रहा है।

फिलहाल तीनों चूजे रिवाइल्डिंग टनल में अपने आसपास के वातावरण को समझ रहे हैं। वे मिट्टी, झाड़ियों और घास के बीच घूमते हुए धीरे-धीरे जंगल में जीवन जीने के जरूरी तौर-तरीके सीख रहे हैं। उम्मीद है कि पूरी तरह तैयार होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। यह प्रयास गोडावण की घटती आबादी को बचाने और राजस्थान के इस दुर्लभ पक्षी को फिर से खुले रेगिस्तानी इलाकों में बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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