‘स्कूल छोड़ रामकथा की व्यवस्था देखें’… बूंदी में 5 सरकारी टीचरों की लगी ड्यूटी, मच गया हंगामा
राजस्थान के बूंदी जिले के बांसी स्थित अंबिका माता मंदिर में आयोजित रामकथा को लेकर प्रशासन के एक आदेश ने सियासी और शैक्षणिक हलकों में विवाद खड़ा कर दिया। पिछले तीन दिनों से चल रही नौ दिवसीय रामकथा में व्यवस्था संभालने के लिए सरकारी स्कूल के पांच शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने का मामला सामने आते ही शिक्षक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विवाद बढ़ने के बाद बुधवार को संबंधित आदेश को वापस ले लिया गया।
जानकारी के अनुसार बांसी के अंबिका माता मंदिर में 30 जनवरी से नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन शुरू हुआ है, जो 7 फरवरी तक चलेगी। इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए विभिन्न विभागों से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई थी। इसी क्रम में सरकारी विद्यालयों के पांच शिक्षकों को भी रामकथा स्थल पर तैनात करने का आदेश जारी किया गया।
आदेश जारी होते ही शिक्षक संगठनों ने इसे शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय बताया। उनका कहना था कि पहले से ही सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, ऐसे में पढ़ाई का समय छोड़कर धार्मिक कार्यक्रमों में ड्यूटी लगाना छात्रों के हितों के खिलाफ है। संगठनों ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी स्कूलों में शिक्षण कार्य करना है, न कि गैर-शैक्षणिक या धार्मिक आयोजनों में व्यवस्था संभालना।
मामला राजनीतिक रंग भी ले गया। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, तब उन्हें कक्षाओं से हटाकर धार्मिक आयोजनों में क्यों लगाया जा रहा है। डोटासरा ने इसे शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया और कहा कि सरकार को प्राथमिकता तय करनी चाहिए।
विवाद बढ़ता देख शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन बैकफुट पर आ गया। बुधवार को संबंधित आदेश को वापस लेने की पुष्टि की गई। अधिकारियों का कहना है कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा और शिक्षकों को उनके मूल कार्य से नहीं हटाया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामकथा जैसे धार्मिक आयोजन क्षेत्र की आस्था से जुड़े होते हैं और प्रशासन को व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी ही पड़ती हैं। हालांकि, उनका भी मानना है कि इसके लिए शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
उधर, शिक्षकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर असंतोष देखने को मिला। उनका कहना है कि समय-समय पर जनगणना, चुनाव ड्यूटी और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए भी शिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। ऐसे में धार्मिक कार्यक्रमों में ड्यूटी लगाना अतिरिक्त बोझ के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल आदेश वापसी के बाद विवाद शांत होता नजर आ रहा है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाना उचित है। 7 फरवरी तक चलने वाली रामकथा के दौरान प्रशासन अब नई व्यवस्था के तहत कार्यक्रम संचालन की तैयारी में जुट गया है।

