Samachar Nama
×

किशनगढ़ की मार्बल मंडी पर वैश्विक संकट की मार, कारोबार 50% तक सिमटा

किशनगढ़ की मार्बल मंडी पर वैश्विक संकट की मार, कारोबार 50% तक सिमटा

Kishangarh, जिसे देश की सबसे बड़ी मार्बल मंडियों में गिना जाता है, इन दिनों वैश्विक परिस्थितियों के चलते गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों और कच्चे माल की आपूर्ति में आ रही बाधाओं ने इस उद्योग की रफ्तार को धीमा कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, वर्तमान हालात में मार्बल मंडी का कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक घट गया है। इसका सीधा असर इस क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों और श्रमिकों पर पड़ा है। अनुमान है कि लगभग 70 हजार श्रमिकों की आजीविका पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

Kishangarh की मार्बल इंडस्ट्री मुख्य रूप से आयातित कच्चे पत्थरों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने उत्पादन और व्यापार दोनों को प्रभावित किया है।

हालांकि, इस मुद्दे पर मार्बल एसोसिएशन और स्थानीय व्यापारियों के बीच मतभेद भी सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर कुछ व्यापारी स्थिति को गंभीर मानते हुए सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ का कहना है कि यह अस्थायी संकट है और जल्द स्थिति सामान्य हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कच्चे माल की आपूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो इसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, Kishangarh की पहचान बनी मार्बल मंडी इस समय वैश्विक संकट के दबाव में है, और इससे उबरने के लिए ठोस रणनीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

Share this story

Tags