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कैलाश खेर बोले- अवॉर्ड मिलना ऐसा है जैसे अपने ही घर में प्यार और इज्जत मिलना, फुटेज में देंखे जयपुर में मिला महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय सम्मान

कैलाश खेर बोले- अवॉर्ड मिलना ऐसा है जैसे अपने ही घर में प्यार और इज्जत मिलना, फुटेज में देंखे जयपुर में मिला महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय सम्मान

बॉलीवुड के मशहूर गायक कैलाश खेर का कहना है कि किसी कलाकार के लिए सम्मान मिलना सिर्फ पुरस्कार हासिल करना नहीं, बल्कि अपनेपन और स्वीकार किए जाने का एहसास है। उन्होंने कहा, “अवॉर्ड मिलना ऐसा है, जैसे अपने ही घर में प्यार मिल रहा हो, इज्जत मिल रही हो। जिस घर में जिंदगीभर यह संदेह बना रहता है कि मैं यहां स्वीकार किया गया हूं या नहीं, मैं कामयाब हुआ हूं या नहीं, वहां से मिलने वाला सम्मान इन सवालों का जवाब देता है।”कैलाश खेर ने ये बातें जयपुर में मीडिया से विशेष बातचीत के दौरान कहीं। जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से आयोजित सवाई जयपुर अवॉर्ड समारोह में उन्हें महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस मौके पर उन्होंने अपने संगीत सफर, शुरुआती संघर्ष, कलाकारों के प्रति समाज की सोच और जयपुर के पूर्व राजपरिवार के साथ अपने पुराने रिश्तों को याद किया।

सफलता से पहले कलाकार को झेलना पड़ता है संघर्ष

कैलाश खेर के मुताबिक, भारत में किसी कलाकार के लिए अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता। सफलता हासिल करने से पहले उ कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई बार उसकी प्रतिभा पर सवाल उठाए जाते हैं, उसे अस्वीकृति झेलनी पड़ती है और अपनी जगह बनाने के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है।उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि कलाकार की यात्रा केवल संगीत या कला तक सीमित नहीं होती। इसके साथ भावनात्मक संघर्ष भी जुड़ा रहता है। जब किसी कलाकार को लंबे समय तक अपनी पहचान और प्रतिभा साबित करनी पड़ती है, तो उसके मन में यह सवाल बना रह सकता है कि समाज उसे स्वीकार कर रहा है या नहीं।ऐसे में जब उसी समाज से सम्मान मिलता है, तो वह कलाकार के लिए खास मायने रखता है। यह सम्मान उसके वर्षों के संघर्ष और मेहनत को पहचान देने के साथ ही उसे अपनाए जाने का एहसास भी कराता है।

कलाकारों की संवेदनशीलता को समझना जरूरी

कैलाश खेर ने कलाकारों की संवेदनशीलता और समाज में उनकी स्थिति पर भी अपने विचार रखे। कला से जुड़े लोगों के लिए उनकी रचनात्मकता के साथ भावनाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। संगीतकार और गायक अपने अनुभवों, विचारों और भावनाओं को अपनी कला के जरिए लोगों तक पहुंचाते हैं।ऐसे में कलाकारों को मिलने वाली प्रशंसा और सम्मान उनके लिए केवल पेशेवर उपलब्धि नहीं होते, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी महत्वपूर्ण होते हैं। कैलाश खेर की बातों से यह संदेश सामने आया कि कलाकार की सफलता को केवल लोकप्रियता या कामयाबी के पैमाने पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसके पीछे छिपे संघर्ष और भावनात्मक अनुभवों को भी समझना चाहिए।

जयपुर के पूर्व राजपरिवार से पुराने रिश्तों को किया याद

सवाई जयपुर अवॉर्ड समारोह में सम्मानित होने के दौरान कैलाश खेर ने जयपुर के पूर्व राजपरिवार के साथ अपने पुराने रिश्तों को भी याद किया। महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय अवॉर्ड मिलना उनके लिए खास अवसर रहा।कैलाश खेर भारतीय संगीत जगत में अपनी अलग आवाज और सूफी संगीत की शैली के लिए पहचाने जाते हैं। उनके संगीत सफर में संघर्ष से लेकर पहचान और लोकप्रियता तक का लंबा दौर शामिल रहा है। ऐसे में जयपुर में मिला यह सम्मान उनके लिए अपनी यात्रा को याद करने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी बना।उनकी बातों का सार यही रहा कि किसी कलाकार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि उसे अपने लोगों के बीच स्वीकार्यता और सम्मान मिले। लंबे संघर्ष के बाद मिलने वाला ऐसा सम्मान कलाकार को यह भरोसा देता है कि उसकी मेहनत और प्रतिभा को आखिरकार पहचान मिली है।

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