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जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा की मौत, परिजनों ने स्कूल पर लापरवाही का आरोप लगाया

जवाहर नवोदय विद्यालय की छात्रा की मौत, परिजनों ने स्कूल पर लापरवाही का आरोप लगाया

जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय, लोधा में अध्ययनरत सातवीं कक्षा की छात्रा की 21 जनवरी, बुधवार को मौत हो गई। इस घटना ने स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्रा की तबीयत स्कूल में ही बिगड़ी थी, जिसके बाद उसका इलाज विद्यालय द्वारा कराया जा रहा था, लेकिन परिजनों ने विद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

परिवार का दावा है कि समय रहते सही इलाज नहीं मिलने और गलत दवाइयां देने के कारण छात्रा की जान चली गई। बुधवार सुबह परिजनों ने कलेक्ट्रेट में हंगामा किया, और दोपहर को सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

मृतका के चाचा शांतिलाल यादव ने मीडिया को बताया कि स्कूल की लापरवाही और भारी मात्रा में दी गई दवाओं के कारण छात्रा के शरीर के महत्वपूर्ण अंग, जैसे लीवर और किडनी, काम करना बंद कर दिया। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित चिकित्सकीय ध्यान दिया गया होता, तो शायद यह दुखद घटना टल सकती थी।

स्थानीय लोगों ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की है और कहा कि ऐसे मामले न केवल छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी और भरोसे पर भी सवाल उठाते हैं। कई नागरिकों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से अपील की कि स्कूलों में चिकित्सकीय निगरानी और इमरजेंसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए।

शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन ने फिलहाल इस मामले पर अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज कर तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि क्या छात्रा की मौत में स्कूल की लापरवाही का हाथ था और इसके लिए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में स्वास्थ्य और आपातकालीन प्रबंधन की उचित व्यवस्था होना अत्यंत जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी छात्र की जीवन सुरक्षा को नजरअंदाज करना गंभीर अपराध है, और इसके लिए जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मृतका के परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च स्तर पर न्यायिक और प्रशासनिक पहल करेंगे। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और जीवन की कीमत किसी भी हालत में कम नहीं आंकी जा सकती।

इस घटना ने बांसवाड़ा जिले में शैक्षणिक संस्थानों में स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों की गंभीरता को फिर से उजागर किया है। नागरिकों और अभिभावकों ने कहा कि सभी स्कूलों में फर्स्ट एड, नियमित चिकित्सकीय जांच और आपातकालीन दवाओं की निगरानी सुनिश्चित होनी चाहिए।

जवाहर नवोदय विद्यालय की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग के पास बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जिम्मेदारी बेहद गंभीर है। साथ ही यह चेतावनी भी है कि इस तरह की लापरवाही भविष्य में शैक्षणिक संस्थानों में नहीं दोहराई जानी चाहिए।

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