जयपुर के SMS हॉस्पिटल ट्रॉमा सेंटर आग हादसे की जांच रिपोर्ट में खुलासा, आठ लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
जयपुर के SMS हॉस्पिटल ट्रॉमा सेंटर में पिछले साल हुई आग लगने की घटना की छह महीने बाद आई जांच रिपोर्ट ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में खलबली मचा दी है। रिपोर्ट में हादसे की जिम्मेदारी तय करते हुए आठ लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
घटना पिछले साल हुई थी, जब ट्रॉमा सेंटर में अचानक आग लग गई थी। इस आग ने अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और मरीजों और स्टाफ के लिए गंभीर खतरे का कारण बनी। घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने सुरक्षा जांच और फायर सेफ्टी ऑडिट का आदेश दिया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए।
छह महीने की जांच के बाद आई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सुरक्षा मानकों और फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं होना मुख्य कारण था। इसके अलावा, ट्रॉमा सेंटर में फायर अलार्म और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था सही तरीके से कार्यरत नहीं थी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिम्मेदार व्यक्तियों में अस्पताल के वरिष्ठ स्टाफ, सुरक्षा कर्मी और तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। प्रशासन ने आदेश दिया है कि इन आठ लोगों के खिलाफ कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। यह कार्रवाई न केवल भविष्य में सुरक्षा में सुधार के लिए है, बल्कि यह जनता और मरीजों के विश्वास को बहाल करने का भी प्रयास है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी नियमों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी है। ऐसे हादसे न केवल जान-माल के नुकसान का कारण बनते हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की साख और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाते हैं।
अस्पताल प्रशासन ने जांच रिपोर्ट आने के बाद कहा कि वे सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएंगे। इसमें फायर अलार्म, आपातकालीन निकासी मार्ग, सुरक्षा गार्ड की तैनाती और तकनीकी स्टाफ की जिम्मेदारी को स्पष्ट करना शामिल है।
मरीजों और उनके परिजनों ने रिपोर्ट के खुलासे के बाद प्रशासन से सख्त कार्रवाई और भविष्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सुरक्षा और व्यवस्था का पालन न होना जिंदगी के लिए खतरा बन सकता है।
जांच रिपोर्ट और उसके बाद उठाए गए कदम यह दिखाते हैं कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है। प्रशासन का यह प्रयास अब यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसे हादसे न हों और अस्पताल में मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सर्वोपरि रहे।
इस घटना और रिपोर्ट ने यह भी संदेश दिया है कि कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही किसी भी अस्पताल या सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में अनिवार्य है। जनता की सुरक्षा और विश्वास बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

