राजस्थान को क्रिकेट की दुनिया में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला बहुप्रतीक्षित ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ अब सियासी घमासान का केंद्र बन गया है। जयपुर के चौंप क्षेत्र में बन रहे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य लंबे समय से ठप पड़ा है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट को लेकर अब राजनीति भी तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे सरकार की विफलता करार दिया है। गहलोत ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार के दौरान जिस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा था, वह अब वर्तमान सरकार की उदासीनता के कारण ठप पड़ा हुआ है।
बताया जा रहा है कि यह स्टेडियम बनने के बाद दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में शामिल होता और राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाता। इससे न केवल खेल को बढ़ावा मिलता, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होता।
गहलोत ने अपने बयान में कहा कि यह परियोजना सिर्फ एक स्टेडियम नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और राज्य के गौरव से जुड़ी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस कारण से इस परियोजना का काम रोका गया और क्यों अब तक इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
वहीं, भाजपा सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि परियोजना से जुड़े तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक कारणों की वजह से काम में देरी हुई है।
इस बीच, खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर निराशा देखी जा रही है। उनका मानना है कि यदि यह स्टेडियम समय पर बनकर तैयार हो जाता, तो राजस्थान को बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी का अवसर मिलता।
विशेषज्ञों का कहना है that इस तरह की बड़ी परियोजनाएं अक्सर राजनीतिक बदलाव के बाद प्रभावित होती हैं, जिससे विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि सरकारें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के हित में फैसले लें।
फिलहाल, जयपुर का यह ड्रीम प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है और इसे लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह महत्वाकांक्षी स्टेडियम परियोजना फिर से रफ्तार पकड़ती है या फिर यह केवल राजनीतिक विवादों में ही उलझकर रह जाती है।

