जयपुर नगर निगम चुनाव: 13 अगस्त को तय होगा वार्ड आरक्षण, कई नेताओं की उम्मीदें होंगी पूरी तो कई की तैयारियों पर फिर सकता है पानी
राजधानी जयपुर की सियासत के लिए 13 अगस्त का दिन बेहद अहम रहने वाला है। इस दिन नगर निगम चुनाव के लिए वार्डों का आरक्षण तय किया जाएगा। आरक्षण की घोषणा के साथ ही जयपुर की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। कई नेताओं के लिए यह दिन राहत लेकर आ सकता है, जबकि कई ऐसे दावेदारों की वर्षों की राजनीतिक तैयारियों पर पानी फिर सकता है।
नगर निगम चुनाव को लेकर लंबे समय से वार्डों में सक्रिय नेता अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हुए हैं। कई संभावित प्रत्याशियों ने पिछले कई वर्षों से अपने क्षेत्र में जनसंपर्क, सामाजिक कार्यक्रमों और स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रियता बनाए रखी है। लेकिन अब वार्ड आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तय होगा कि कौन चुनाव मैदान में उतर पाएगा।
आरक्षण प्रक्रिया के बाद कई वार्डों की तस्वीर बदल जाएगी। जिन वार्डों में सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग के लिए सीट आरक्षित होगी, वहां मौजूदा दावेदारों के समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में नेताओं की नजरें अब 13 अगस्त को होने वाली आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वार्ड आरक्षण के बाद जयपुर नगर निगम चुनाव की तैयारियां और तेज हो जाएंगी। टिकट की दावेदारी को लेकर नेताओं की भागदौड़ बढ़ेगी और पार्टियों के सामने भी प्रत्याशी चयन की चुनौती होगी।
कई नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी शुरू कर रखी है। उन्होंने स्थानीय लोगों से संपर्क बढ़ाने के साथ ही पार्टी संगठन में भी अपनी सक्रियता दिखाई है। लेकिन अगर वार्ड आरक्षण उनके अनुकूल नहीं रहा तो उन्हें नए समीकरणों के हिसाब से रणनीति बदलनी पड़ सकती है।
वहीं, कुछ नए चेहरों के लिए आरक्षण की घोषणा अवसर लेकर आ सकती है। खास वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने पर कई ऐसे नेता भी चुनावी दौड़ में शामिल हो सकते हैं, जो अब तक इंतजार कर रहे थे।
नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। वार्ड आरक्षण के बाद दोनों पार्टियां संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन शुरू करेंगी।
अब सभी की निगाहें 13 अगस्त की दोपहर होने वाली वार्ड आरक्षण प्रक्रिया पर हैं। इसके बाद ही साफ होगा कि जयपुर नगर निगम चुनाव में कौन से चेहरे मैदान में उतरेंगे और किसकी राजनीतिक रणनीति सफल होगी।

