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जयपुर लोक अदालत का फैसला: हाउसिंग बोर्ड पर 42 हजार रुपये जुर्माना, 2 महीने में दुकानों के ट्रांसफर का आदेश

भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा को अभेद्य बनाने और अवैध घुसपैठ पर लगाम कसने के लिए प्रशासन और खुफिया एजेंसियों ने 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत अब तक का सबसे बड़ा मैन-टू-मैन सर्वे शुरू किया है।

जयपुर महानगर प्रथम की स्थाई लोक अदालत ने हाउसिंग बोर्ड के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। नीलामी में सफल बोलीदाता के पक्ष में दुकानों की सेल डीड (विक्रय पत्र) समय पर निष्पादित नहीं करने पर अदालत ने हाउसिंग बोर्ड पर 42 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

समय पर सेल डीड न करने पर कार्रवाई

मामले के अनुसार, हाउसिंग बोर्ड ने नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद दुकानों का विक्रय पत्र (सेल डीड) परिवादी के नाम जारी नहीं किया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।

लोक अदालत का निर्देश

लोक अदालत ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा है कि हाउसिंग बोर्ड आगामी 2 महीनों के भीतर दोनों दुकानों का नामांतरण (ट्रांसफर) परिवादी के नाम सुनिश्चित करे। साथ ही जुर्माने की राशि का भुगतान भी किया जाए।

पारदर्शिता पर जोर

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी संस्थानों को नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता का पालन करना चाहिए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल

इस फैसले के बाद हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। वहीं, कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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