मुर्गी फार्म की आड़ में ISI का फंडिंग नेटवर्क, वीडियो में देंखे राजस्थान CID की पूछताछ में बड़े खुलासे, 4 साल से सक्रिय था आरोपी
राजस्थान पुलिस की सीआईडी (इंटेलिजेंस) की जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित फंडिंग नेटवर्क को लेकर कई अहम खुलासे सामने आए हैं। पूछताछ में आरोपी रफीक चांद शेख ने ऐसे कई तथ्यों का खुलासा किया है, जिनके आधार पर जांच एजेंसियां देश में सक्रिय अन्य संदिग्ध नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले की जांच आगे बढ़ने पर और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी रफीक चांद शेख पिछले करीब चार वर्षों से कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में था। आरोप है कि वह भारत में सक्रिय कथित जासूसी नेटवर्क तक धन पहुंचाने का काम करता था। इसके लिए उसने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक मुर्गी (पोल्ट्री) फार्म संचालित कर रखा था, जिसे वह अपने वैध व्यवसाय के रूप में पेश करता था।
पोल्ट्री फार्म की आड़ में चल रहा था कथित नेटवर्क
सीआईडी की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, पोल्ट्री फार्म का इस्तेमाल कथित तौर पर केवल एक आड़ के रूप में किया जा रहा था। एजेंसियों का आरोप है कि इसी व्यवसाय की आड़ में रफीक चांद शेख भारत में सक्रिय कथित जासूसों तक धन पहुंचाने का काम करता था। इससे वह स्थानीय लोगों और सुरक्षा एजेंसियों के संदेह से बचने की कोशिश करता था।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर ISI इस काम के बदले आरोपी को 3 से 5 प्रतिशत तक कमीशन देती थी। जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि यह धन किस माध्यम से भारत पहुंचता था और किन-किन लोगों तक वितरित किया जाता था।
औरंगाबाद में ठिकानों की जांच जारी
राजस्थान सीआईडी (इंटेलिजेंस) की टीम फिलहाल आरोपी को साथ लेकर महाराष्ट्र के औरंगाबाद में उसके विभिन्न ठिकानों की जांच कर रही है। वहां से दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य संभावित साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
अधिकारियों का उद्देश्य आरोपी के कथित नेटवर्क, उसके संपर्कों और धन के लेनदेन की पूरी श्रृंखला का पता लगाना है। जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं।
अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश
सीआईडी अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर देश में सक्रिय अन्य संदिग्ध व्यक्तियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। हालांकि, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और एजेंसियां किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी, एजेंसियां जुटा रहीं साक्ष्य
फिलहाल राजस्थान पुलिस की सीआईडी (इंटेलिजेंस) इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित फंडिंग नेटवर्क कितना बड़ा था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके तार किन स्थानों तक जुड़े हुए थे।
जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य सामने आने के बाद ही एजेंसियां इस मामले में आगे की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारियों को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा करेंगी।

