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PM ग्रामीण सड़क योजना में गड़बड़ी का मामला, PWD के 3 इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ ACB ने पेश किया चालान

PM ग्रामीण सड़क योजना में गड़बड़ी का मामला, PWD के 3 इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ ACB ने पेश किया चालान

कोटा एसीबी ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जिले के PWD विभाग से जुड़े तीन इंजीनियरों और एक ठेकेदार के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। मामला प्रतापगढ़ जिले की पीपलखूंट तहसील में बनाई गई तीन संपर्क सड़कों के निर्माण से जुड़ा है।

आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने के साथ ही काम पूरा होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। शिकायत मिलने के बाद कोटा एसीबी ने मामले की जांच की थी।

तीन संपर्क सड़कों के निर्माण में मिली गड़बड़ी

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोटा एसीबी विजय स्वर्णकार ने बताया कि पीपलखूंट तहसील क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत तीन संपर्क सड़कों का निर्माण कराया गया था।

जांच के दौरान इन सड़कों के निर्माण में कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं। निर्माण कार्य में निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किए जाने और कार्य की वास्तविक स्थिति से अलग भुगतान किए जाने के आरोपों की जांच की गई।

काम पूरा होने से पहले भुगतान का आरोप

एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि सड़क निर्माण का काम पूरी तरह पूरा होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। सरकारी योजना में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति के आधार पर भुगतान किया जाना होता है।

ऐसे में कार्य पूरा होने से पहले भुगतान किए जाने को गंभीर अनियमितता माना गया। जांच एजेंसी ने संबंधित दस्तावेजों और निर्माण कार्य से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की।

तीन इंजीनियर और ठेकेदार आरोपी

मामले में PWD विभाग के तीन इंजीनियरों और संबंधित ठेकेदार को आरोपी बनाया गया है। एसीबी ने जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया।

जांच के दौरान निर्माण कार्य से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, भुगतान दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की गई। इसके आधार पर एसीबी ने अदालत के समक्ष अपना चालान प्रस्तुत किया है।

घटिया सामग्री के इस्तेमाल की भी जांच

सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे थे। एसीबी ने यह जांच की कि निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

यदि सरकारी योजना के तहत स्वीकृत मानकों से कम गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल हुआ है तो इससे सड़क की मजबूती और उसकी उम्र पर भी असर पड़ सकता है।

कोर्ट में होगी आगे की कार्रवाई

एसीबी की ओर से चालान पेश किए जाने के बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कोर्ट में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। ऐसे में निर्माण कार्य में अनियमितता और सरकारी राशि के गलत इस्तेमाल के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं। अब अदालत की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप कितने साबित होते हैं।

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