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महंगाई, पलायन और गैस संकट की तिहरी मार, शहर के कारीगरों और श्रमिकों की बढ़ी चिंता

महंगाई, पलायन और गैस संकट की तिहरी मार, शहर के कारीगरों और श्रमिकों की बढ़ी चिंता

शहर में काम कर रहे बंगाली कारीगरों और बिहारी श्रमिकों पर इन दिनों तिहरी मार पड़ रही है, जिससे उनके सामने रोज़गार और जीवनयापन का संकट गहराता जा रहा है। एक ओर सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों ने काम को प्रभावित किया है, वहीं पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के चलते कारीगरों का पलायन तेज हो गया है। इसके साथ ही गैस सिलेंडर की किल्लत ने हालात को और भी मुश्किल बना दिया है।

दरअसल, शहर के सर्राफा और आभूषण कारोबार में बड़ी संख्या में बंगाल से आए कारीगर काम करते हैं। ये कारीगर अपनी बारीक कारीगरी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हाल ही में सोने-चांदी के दामों में आई तेज़ बढ़ोतरी के कारण आभूषणों की मांग में कमी आई है। इसका सीधा असर कारीगरों के काम और उनकी आय पर पड़ा है। कई दुकानों पर काम कम होने के चलते कारीगरों को खाली बैठना पड़ रहा है या उन्हें कम मजदूरी पर काम करना पड़ रहा है।

इसी बीच पश्चिम बंगाल में चुनावी गतिविधियों के चलते बड़ी संख्या में कारीगर अपने गृह राज्य लौट रहे हैं। चुनाव के दौरान परिवार और सामाजिक कारणों से उनका वापस जाना आम बात है, लेकिन इस बार पलायन की संख्या अधिक होने से स्थानीय स्तर पर कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि कुशल कारीगरों की कमी के कारण ऑर्डर पूरे करने में दिक्कत आ रही है।

वहीं दूसरी ओर बिहारी श्रमिकों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। निर्माण कार्यों और छोटे उद्योगों में लगे ये श्रमिक पहले से ही सीमित आय में गुज़ारा कर रहे थे, लेकिन अब गैस सिलेंडर की किल्लत ने उनके सामने अतिरिक्त समस्या खड़ी कर दी है। रसोई गैस की उपलब्धता में कमी और बढ़ती कीमतों के कारण उनके दैनिक खर्च में बढ़ोतरी हो गई है, जिससे उनका बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

भविष्य को लेकर बिहारी श्रमिकों में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उन्हें भी अपने गांव लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। काम की अनिश्चितता और बढ़ते खर्च के बीच शहर में टिके रहना उनके लिए चुनौती बनता जा रहा है।

स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से श्रमिकों और व्यापारियों को राहत की उम्मीद है। उनका मानना है कि यदि जल्द ही महंगाई पर नियंत्रण, गैस आपूर्ति में सुधार और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

कुल मिलाकर, शहर के कारीगरों और श्रमिकों के लिए यह समय कठिनाइयों से भरा हुआ है, जहां तिहरी मार ने उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है।

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