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भारत मसालों का वैश्विक केंद्र: 44 लाख हेक्टेयर में खेती, 111.55 लाख टन उत्पादन

भारत मसालों का वैश्विक केंद्र: 44 लाख हेक्टेयर में खेती, 111.55 लाख टन उत्पादन

भारत विश्व का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता तथा निर्यातक देश है। वर्तमान में देश में लगभग 44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मसालों की खेती की जा रही है। कुल उत्पादन 111.55 लाख टन तक पहुंच चुका है और इसका वार्षिक आर्थिक मूल्य लगभग 37,000 से 40,000 करोड़ रुपये के बीच आंका गया है।

यह जानकारी Dr. Vinay Bhardwaj, निदेशक National Research Centre on Seed Spices, तबीजी ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि भारत की विविध जलवायु और मिट्टी की अनुकूल परिस्थितियों के कारण देश में कई प्रकार के मसालों का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है।

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि देश में जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी, हल्दी, मिर्च, अदरक और इलायची जैसे अनेक मसालों की खेती व्यापक स्तर पर होती है। इनमें से कई मसाले अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी काफी मांग में रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय मसालों की गुणवत्ता और सुगंध के कारण वैश्विक बाजार में उनकी विशेष पहचान है।

उन्होंने यह भी बताया कि मसाला उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खासतौर पर शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में बीजीय मसालों की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। नई तकनीकों, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार कर सकते हैं।

तबीजी स्थित अनुसंधान केंद्र द्वारा मसालों की उन्नत किस्मों के विकास, उत्पादन तकनीकों के प्रसार और किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र के वैज्ञानिक समय-समय पर किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और जागरूकता शिविर भी आयोजित करते हैं, ताकि किसान आधुनिक तकनीकों का लाभ उठा सकें।

डॉ. भारद्वाज ने कहा कि मसालों का निर्यात भी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारतीय मसालों की मांग अमेरिका, यूरोप, मध्य-पूर्व और एशियाई देशों में लगातार बढ़ रही है। इस कारण मसाला उत्पादन और निर्यात दोनों क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से भारत मसाला उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत करेगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

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