उदयपुर में जिला प्रमुख बनने की होड़, भाजपा के 47 में से 44 जिला परिषद सदस्य प्रत्याशी रिसॉर्ट में कैद
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव-2026 के तहत उदयपुर जिला परिषद चुनाव की मतगणना 20 नवंबर को होनी है, लेकिन इससे पहले ही भारतीय जनता पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है। जिला प्रमुख पद के चुनाव को लेकर पार्टी में खींचतान और बाड़ेबंदी का दौर शुरू हो गया है। 25 नवंबर को होने वाले जिला प्रमुख के चुनाव से पहले भाजपा ने अपने जिला परिषद सदस्य प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, भाजपा के 47 जिला परिषद सदस्य प्रत्याशियों में से 44 को एक निजी रिसॉर्ट में ठहराया गया है। कुंभलगढ़ के एक निजी रिसॉर्ट में की गई इस बाड़ेबंदी को जिला प्रमुख पद के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
जिला प्रमुख पद को लेकर बढ़ी खींचतान
उदयपुर जिला परिषद में जिला प्रमुख का पद हासिल करने के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 20 नवंबर को होने वाली मतगणना से पहले ही पार्टी के भीतर दावेदारी और रणनीति को लेकर हलचल दिखाई देने लगी है। जिला प्रमुख का चुनाव 25 नवंबर को होना है। ऐसे में भाजपा अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटी है।
47 में से 44 प्रत्याशी रिसॉर्ट में
भाजपा के कुल 47 जिला परिषद सदस्य प्रत्याशियों में से 44 को रिसॉर्ट में ठहराए जाने की जानकारी सामने आई है। चुनावी राजनीति में इस तरह की व्यवस्था को बाड़ेबंदी कहा जाता है। इसका उद्देश्य मतदान और पद के चुनाव तक सदस्यों को एक साथ रखना तथा संभावित राजनीतिक खींचतान से बचाना होता है।
नेतृत्व और दावेदारी पर निगाहें
जिला प्रमुख पद को लेकर पार्टी के भीतर किसकी दावेदारी मजबूत होगी और नेतृत्व किस नाम पर सहमति बनाएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद जिला परिषद सदस्यों की स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद 25 नवंबर को होने वाला जिला प्रमुख पद का चुनाव उदयपुर की स्थानीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल मतगणना से पहले ही भाजपा की बाड़ेबंदी और जिला प्रमुख बनने की होड़ चर्चा का विषय बन गई है।

