वीडियो में देंखे एसओजी ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार सहित 18 लोगों को फर्जी FMGE सर्टिफिकेट मामले में गिरफ्तार किया
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा को गिरफ्तार किया है। इस मामले में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 15 एमबीबीएस कैंडिडेट शामिल हैं। ये सभी विदेश से डिग्री लेकर आए थे और फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) सर्टिफिकेट के आधार पर रजिस्ट्रेशन करवाकर अस्पतालों में डॉक्टर के रूप में काम कर रहे थे।
एसओजी की पूछताछ में सामने आया कि इन कैंडिडेट्स ने फर्जी FMGE सर्टिफिकेट खरीदने के लिए 20 से 25 लाख रुपए खर्च किए थे। इसके बाद उन्होंने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवा लिया। यह खुलासा चिकित्सा क्षेत्र और मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला माना जा रहा है।
एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि यह कार्रवाई दिल्ली, जयपुर, उदयपुर, जोधपुर सहित राजस्थान के 9 जिलों में एक साथ चलाए गए अभियान का हिस्सा थी। कुल 21 टीमों ने एक coordinated ऑपरेशन करके आरोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में पूर्व रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा का नाम सबसे प्रमुख है। डॉक्टर राजेश शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट वाले कैंडिडेट्स को मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने में मदद की। इसके जरिए कई लोग बिना वैध परीक्षा पास किए ही अस्पतालों में डॉक्टर बनकर काम कर रहे थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले न केवल चिकित्सा पेशेवरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि रोगियों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर भी गंभीर असर डालते हैं। अगर अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों के सर्टिफिकेट फर्जी हैं, तो यह मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
एसओजी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए कैंडिडेट्स और अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत सर्टिफिकेट की जांच और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए जा सकते हैं।
यह कार्रवाई चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त संदेश देती है। राज्य और केंद्र सरकार दोनों इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से ले रही हैं और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सिस्टम को और मजबूत बनाने की योजना बना रही हैं।
एसओजी ने कहा कि यह ऑपरेशन लंबी जांच और निगरानी के बाद संपन्न हुआ। टीमों ने फर्जी सर्टिफिकेट और दस्तावेजों की जांच के लिए कई जगहों पर तलाशी ली और आरोपी नेटवर्क का पूरा खुलासा किया।
इस तरह, एसओजी की इस कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और भ्रष्टाचार के मामलों में अब कोई बख्शा नहीं जाएगा, और स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

