राजस्थान वनरक्षक भर्ती में 5 लाख में तय हुआ था फर्जीवाड़े का सौदा, वीडियो में जाने SOG ने मूल अभ्यर्थी और डमी कैंडिडेट को पकड़ा
राजस्थान में वनरक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2020 में फर्जी तरीके से परीक्षा देने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि मूल अभ्यर्थी भारत मीणा ने अपनी जगह डमी अभ्यर्थी दिनेश कुमार विश्नोई को परीक्षा में बैठाया था। आरोप है कि नौकरी लगवाने के नाम पर दोनों के बीच 5 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।गिरफ्तार आरोपियों में मूल अभ्यर्थी भारत मीणा भरतपुर का निवासी है, जबकि डमी अभ्यर्थी दिनेश कुमार विश्नोई जालौर का रहने वाला है। एसओजी अब मामले में दोनों की भूमिका और कथित सौदे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
2020 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है मामला
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 में फर्जी तरीके से परीक्षा देने के संबंध में एसओजी थाने में 26 सितंबर 2025 को मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच के दौरान परीक्षा में हुई कथित धोखाधड़ी से जुड़े तथ्य सामने आए।जांच में पता चला कि भारत मीणा ने वनरक्षक भर्ती परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा देने के लिए वह खुद केंद्र पर नहीं पहुंचा। उसकी जगह दिनेश कुमार विश्नोई परीक्षा देने गया था। आरोप है कि दिनेश ने परीक्षा केंद्र में खुद को मूल अभ्यर्थी के रूप में पेश किया।
एडमिट कार्ड पर फोटो लगाकर दिए फर्जी हस्ताक्षर
जांच के अनुसार, दिनेश कुमार विश्नोई ने कथित तौर पर परीक्षा केंद्र में अवैध रूप से प्रवेश किया। उसने प्रवेश पत्र और एडमिट कार्ड पर अपनी फोटो चिपका दी। इसके साथ ही उसने मूल अभ्यर्थी भारत मीणा के फर्जी हस्ताक्षर किए और उसकी जगह परीक्षा दी।एसओजी की जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले में नौकरी लगवाने के नाम पर 5 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि तय रकम का भुगतान हुआ था या नहीं और इस फर्जीवाड़े में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी थी या नहीं।
एसओजी कर रही है आगे की जांच
वनरक्षक भर्ती परीक्षा में डमी अभ्यर्थी के बैठने का मामला सामने आने के बाद एसओजी ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है।भर्ती परीक्षाओं में किसी दूसरे व्यक्ति को अभ्यर्थी की जगह बैठाना और पहचान से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर करना गंभीर अनियमितता के दायरे में आता है। ऐसे मामलों में जांच के जरिए यह पता लगाना जरूरी होता है कि फर्जी तरीके से परीक्षा देने की योजना कैसे बनाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।फिलहाल एसओजी दोनों आरोपियों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

