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राजस्थान विधानसभा में बीजेपी विधायक ने उठाया ‘युवाओं का घर से भागकर प्रेम विवाह’ का मुद्दा

राजस्थान विधानसभा में बीजेपी विधायक ने उठाया ‘युवाओं का घर से भागकर प्रेम विवाह’ का मुद्दा

भारत में प्रेम विवाह की अवधारणा समाज में अभी भी पूरी तरह से स्वीकार्य नहीं है। कई परिवारों में यह परंपरा, समाज और मान-सम्मान से जुड़ा हुआ विषय माना जाता है। ऐसे में कई लड़के-लड़कियां अपनी प्रेम संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर घर से भाग जाते हैं। यह समस्या खासकर उन राज्यों और क्षेत्रों में अधिक देखी जाती है जहां पारंपरिक और सांस्कृतिक मूल्यों को आज भी उच्च प्राथमिकता दी जाती है।

इसी कड़ी में राजस्थान विधानसभा में हाल ही में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। आहोर से भाजपा विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने शून्य काल के दौरान सदन में युवाओं के घर से भागकर प्रेम विवाह करने की समस्या को उठाया। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि इससे भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को भी ठेस पहुंच रही है। विधायक ने सदन में यह सवाल उठाया कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने और युवाओं को सही मार्गदर्शन देने के लिए क्या कदम उठा रही है।

विधायक ने अपने भाषण में यह भी कहा कि युवाओं का यह कदम परिवार और समाज के लिए चुनौती बन रहा है। उन्होंने यह महसूस कराने की कोशिश की कि यदि युवा परिवार की अनुमति और आशीर्वाद के बिना विवाह करते हैं, तो इससे केवल व्यक्तिगत जीवन में समस्याएं नहीं आती, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी विवाद पैदा होते हैं। उन्होंने यह सुझाव दिया कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए और परिवारों और युवाओं के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में प्रेम विवाह को पूरी तरह स्वीकार करने में समय लगेगा। सामाजिक मान्यताएं और पारिवारिक परंपराएं लोगों की सोच पर गहरा प्रभाव डालती हैं। कई परिवारों में विवाह केवल उनके समाजिक नेटवर्क और रीति-रिवाजों के अनुरूप तय किया जाता है। ऐसे में युवा अक्सर दबाव और विरोध का सामना करते हैं। इससे कई बार वे भागकर विवाह करने का विकल्प चुनते हैं, जो आगे चलकर कानूनी और मानसिक जटिलताओं का कारण बन सकता है।

राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों को समाज में उच्च महत्व दिया जाता है, वहां यह समस्या और भी संवेदनशील होती है। विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने अपने बयान में सरकार से आग्रह किया कि वह युवाओं के लिए सलाह और मार्गदर्शन उपलब्ध कराए ताकि वे बिना किसी दबाव और अनावश्यक जोखिम के अपने जीवन की महत्वपूर्ण निर्णय ले सकें।

इस मुद्दे पर सदन में चर्चा ने यह भी उजागर किया कि युवा और परिवार के दृष्टिकोण में अंतर के कारण कई बार अप्रत्याशित विवाद पैदा होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में खुला संवाद और शिक्षा के माध्यम से प्रेम विवाह और पारंपरिक मान्यताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

विधायक की इस पेशकश से यह स्पष्ट हुआ कि राजस्थान विधानसभा में पारंपरिक और आधुनिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना अभी भी एक संवेदनशील और चर्चा योग्य मुद्दा है। यह मामला न केवल कानून और नीति बनाने वालों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि किस तरह से युवा और परिवार दोनों के हितों को संतुलित किया जा सकता है।

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