राजस्थान में 1 हजार पूर्व सरपंचों पर चुनाव लड़ने का संकट! किसी पर गबन तो कोई रिश्वत लेते पकड़ा गया, अलवर में सबसे ज्यादा 300 मामले
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले करीब एक हजार पूर्व सरपंचों के सामने चुनाव लड़ने को लेकर संकट खड़ा हो गया है। भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में कार्रवाई का सामना कर रहे इन पूर्व सरपंचों की उम्मीदवारी पर सवाल उठ रहे हैं। इनमें कुछ पर सरकारी राशि के गबन के आरोप हैं, जबकि कुछ रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके हैं।
पंचायत चुनावों से पहले प्रशासन ने ऐसे मामलों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जिन पूर्व सरपंचों के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग, गबन, भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर अनियमितताओं के मामले दर्ज हैं, उनके चुनाव लड़ने की पात्रता जांची जा रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में पूर्व जनप्रतिनिधियों के लिए आगामी पंचायत चुनाव में मैदान में उतरना मुश्किल हो सकता है।
सबसे ज्यादा मामले अलवर जिले में सामने आए हैं। यहां 300 से ज्यादा पूर्व सरपंचों के खिलाफ गबन और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से इन मामलों की जांच और रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। चुनाव से पहले पात्र और अपात्र उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
दरअसल, पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर नियम काफी महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी पूर्व सरपंच के खिलाफ सरकारी धन के गबन या भ्रष्टाचार से जुड़ी कार्रवाई चल रही है, तो संबंधित मामले की प्रकृति और कानूनी स्थिति के आधार पर उसकी चुनावी पात्रता प्रभावित हो सकती है। हालांकि केवल आरोप लगने से हर व्यक्ति स्वतः चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं हो जाता। अंतिम स्थिति संबंधित नियमों, आदेशों और मामले की कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी।
पूर्व सरपंचों पर कार्रवाई का मुद्दा पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। कई मामलों में जांच लंबे समय से चल रही है, जबकि कुछ मामलों में अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई है। अब चुनाव कार्यक्रम के साथ इन मामलों की स्थिति तेजी से महत्वपूर्ण हो गई है।
अलवर के बाद अन्य जिलों में भी ऐसे मामलों की संख्या सामने आ रही है। प्रशासन संबंधित रिकॉर्ड खंगालकर यह तय करने की प्रक्रिया में है कि किन उम्मीदवारों पर चुनाव लड़ने से संबंधित नियम लागू होते हैं। इससे उन पूर्व सरपंचों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो दोबारा चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में पूर्व सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधि फिर से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार और गबन से जुड़े मामलों में कार्रवाई का असर चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद कितने पूर्व सरपंच चुनाव लड़ने के योग्य रहते हैं और कितनों को नियमों के कारण चुनावी मैदान से बाहर होना पड़ता है।

