नागौर में 57 वार्ड OBC के लिए आरक्षित, 95 वार्ड महिलाओं के लिए; ST को एक भी सीट नहीं
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर वार्ड आरक्षण की तस्वीर अब साफ होने लगी है। नागौर में वार्डों की आरक्षण लॉटरी के बाद चुनावी समीकरण बदल गए हैं। जिले के निकायों में बड़ी संख्या में वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC और महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं, दी गई जानकारी के अनुसार ST वर्ग के लिए एक भी वार्ड आरक्षित नहीं किया गया है।राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के कुल 10,245 वार्डों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया चल रही है। वार्डवार आरक्षण तय होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की रणनीति भी बदलने लगी है।
57 वार्ड OBC के लिए आरक्षित
नागौर में कुल वार्डों में से 57 वार्ड OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें OBC महिला वर्ग के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं। इससे OBC वर्ग के संभावित उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ने के नए अवसर खुले हैं।आरक्षण की लॉटरी के बाद कई ऐसे दावेदारों को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है, जो लंबे समय से किसी सामान्य वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।
महिलाओं के लिए 95 वार्ड रिजर्व
नागौर में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए 95 वार्ड विभिन्न श्रेणियों में महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें सामान्य महिला के साथ OBC, SC सहित आरक्षित वर्गों की महिला सीटें शामिल हो सकती हैं।महिला आरक्षण के कारण कई वार्डों में राजनीतिक दलों को नए चेहरों पर दांव लगाना पड़ सकता है। संभावित महिला प्रत्याशियों ने भी अब अपने-अपने वार्डों में सक्रियता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
ST वर्ग के लिए नहीं मिली सीट
आरक्षण सूची में ST वर्ग के लिए एक भी वार्ड नहीं रखा गया है। इससे ST वर्ग से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित दावेदारों को झटका लगा है। वहीं, अन्य वर्गों के लिए आरक्षण तय होने के बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव दिखाई देने लगा है।राजस्थान के अन्य निकायों में भी आरक्षण के परिणाम सामने आ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में सामान्य, OBC, SC और ST वर्ग के लिए अलग-अलग आरक्षण तय किया गया है।
अब टिकट को लेकर बढ़ेगी हलचल
वार्ड आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। जिन नेताओं का वार्ड आरक्षित श्रेणी में नहीं आया है, वे दूसरे वार्डों से संभावनाएं तलाश सकते हैं।वहीं, आरक्षित वार्डों में राजनीतिक दल स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों की तलाश करेंगे। खासकर महिला और OBC आरक्षित वार्डों में नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है।आरक्षण लॉटरी ने नागौर की स्थानीय राजनीति का गणित बदल दिया है। अब सभी की नजरें वार्डवार अंतिम सूची और चुनाव कार्यक्रम पर हैं। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन सा दावेदार किस वार्ड से मैदान में उतरता है।

