भीलवाड़ा में बेटियों की सुरक्षा पर सवाल, डेढ़ महीने में तीन नवजात बालिकाएं सुरक्षित नहीं रह सकीं
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और बेटी खिलाओ के नारों की वास्तविकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले डेढ़ महीने में तीन नवजात बालिकाओं की सुरक्षा से संबंधित मामले सामने आए हैं, जिससे इलाके में चिंता बढ़ गई है।
नवजात बालिकाओं की स्थिति
हालिया घटना में वेदिका नाम की नवजात बालिका को समय रहते पहचान कर, अलार्म बजने पर स्टाफ ने तुरंत एनआइसीयू में भर्ती कराया। बाल कल्याण समिति ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सुरक्षा को लेकर एसपी को पत्र लिखा और नवजात की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
बेटी बचाओ अभियान पर प्रश्नचिन्ह
स्थानीय लोग और बाल कल्याण समितियों का कहना है कि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ-बेटी खिलाओ अभियान के नारों के बावजूद भी सुरक्षा व्यवस्था कमजोर साबित हो रही है। जिले में नवजात बालिकाओं के मामलों से स्पष्ट है कि केवल नारे ही नहीं, ठोस कार्रवाई और निगरानी की आवश्यकता है।
प्रशासनिक कदम
बाल कल्याण समितियों ने प्रशासन से अपील की है कि नवजात बालिकाओं की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाई जाए और अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। इसके अलावा, माता-पिता और स्थानीय समाज को भी इस मुद्दे पर सजग रहने की चेतावनी दी गई है।
सामाजिक संदेश
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि बेटियों की सुरक्षा सिर्फ नारे और जागरूकता कार्यक्रमों से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए सरकारी तंत्र, स्वास्थ्य संस्थान और स्थानीय समुदाय को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि नवजात बालिकाओं का जीवन सुरक्षित रह सके।
भीलवाड़ा के इस मामले ने पूरे राज्य में बेटी बचाओ अभियान की वास्तविकता पर ध्यान आकर्षित किया है और सवाल खड़े किए हैं कि क्या योजनाएं सही दिशा में काम कर रही हैं।

