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मिडिल ईस्ट में तनाव का असर: राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट में तनाव का असर: राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट में भड़की युद्ध की आग का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत के घरेलू बाजारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में अचानक हुई बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के विभिन्न जिलों में ईंधन के दामों में ₹3 से ₹4 प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, 15 मार्च 2024 के बाद पहली बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस तरह का उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आई तेजी और सप्लाई चेन में बढ़ते तनाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा जैसे प्रमुख शहरों में पेट्रोल पंपों पर कीमतें सुबह से ही अपडेट कर दी गईं। अचानक हुई इस बढ़ोतरी के चलते वाहन चालकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों में असंतोष देखने को मिल रहा है। रोजाना यात्रा करने वाले आम नागरिकों के बजट पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।

पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं, जिसका सीधा प्रभाव घरेलू रेट्स पर पड़ता है। उनका यह भी कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी सरकार द्वारा निर्धारित ऑटोमैटिक प्राइस एडजस्टमेंट सिस्टम के तहत की जाती है, जिसमें वैश्विक बाजार के रुझानों को ध्यान में रखा जाता है।

वहीं आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। कई देशों में उत्पादन और सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊपर की ओर जा रही हैं। इसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर जल्दी और सीधे रूप से पड़ता है।

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले ही महंगाई से जूझ रहे लोगों के लिए यह बढ़ोतरी अतिरिक्त बोझ साबित हो रही है। खासकर ऑटो, टैक्सी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में काम करने वाले लोगों की लागत बढ़ने से उनकी आमदनी पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और वैश्विक बाजार में स्थिरता आने पर कीमतों में राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। हालांकि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनिश्चित बनी हुई हैं, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और उतार-चढ़ाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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