IIT जोधपुर का अनोखा रिसर्च: AI की मदद से प्राचीन भारतीय ज्ञान-संपदा को पढ़ने और समझने की तैयारी
आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा को फिर से पढ़ने योग्य बनाने और उसमें छिपे ज्ञान को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों में मौजूद जानकारी को आधुनिक तकनीक के जरिए समझना और ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।
शोधकर्ताओं का प्रयास है कि AI आधारित तकनीक के माध्यम से पुरानी और कठिन लिपियों में लिखी सामग्री को पढ़ने तथा उसका अर्थ समझने की प्रक्रिया आसान बनाई जा सके। समय के साथ कई प्राचीन पांडुलिपियां खराब हो रही हैं। कुछ दस्तावेजों की लिखावट धुंधली हो चुकी है, जबकि कई ग्रंथ ऐसी भाषाओं और लिपियों में हैं, जिन्हें पढ़ना आज के समय में आसान नहीं है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने में मददगार साबित हो सकता है।
AI आधारित तकनीक से समझेंगे प्राचीन ग्रंथ
इस शोध पहल के तहत AI आधारित एडैप्टिव तकनीक विकसित करने पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग तरह की प्राचीन लिखावट और भाषाई संरचनाओं को समझने के लिए तकनीक को सक्षम बनाना है। सामान्य डिजिटल स्कैनिंग में किसी पांडुलिपि की तस्वीर तो सुरक्षित हो जाती है, लेकिन उसमें लिखी सामग्री को पढ़ना और समझना चुनौतीपूर्ण बना रहता है।
AI की मदद से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। तकनीक प्राचीन दस्तावेजों में मौजूद अक्षरों, शब्दों और वाक्य संरचनाओं को पहचानने में सहायता कर सकती है। इससे शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए पुरानी सामग्री का अध्ययन आसान होने की संभावना है।
भारत की ज्ञान परंपरा को मिलेगा नया मंच
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन, साहित्य और विज्ञान से जुड़े कई महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं। इनमें मौजूद जानकारी को व्यवस्थित तरीके से पढ़ना और समझना आधुनिक शोध के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
आईआईटी जोधपुर की यह पहल तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के बीच सेतु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में एडैप्टिव AI सिस्टम की पूरी कार्यप्रणाली, शोधकर्ताओं के नाम और प्रोजेक्ट के अगले चरणों का विवरण नहीं दिया गया है।

