उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इस्तीफा दे सकते हैं तो CEC ज्ञानेश कुमार क्यों नहीं: अशोक गहलोत
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। उन्होंने पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उप-राष्ट्रपति अचानक अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी इस्तीफा दे सकते हैं। गहलोत ने कहा कि मौजूदा विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां ज्ञानेश कुमार का पद छोड़ना जरूरी हो गया है।
गहलोत ने सोमवार को जयपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और ऐसे में एक अध्याय समाप्त कर नई शुरुआत होनी चाहिए।
गहलोत ने पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का हवाला देते हुए कहा कि धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अपने पद से इस्तीफा दिया था। गहलोत ने इसी उदाहरण के आधार पर सवाल उठाया कि अगर उप-राष्ट्रपति इस्तीफा दे सकते हैं तो ज्ञानेश कुमार क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि कम से कम एक अध्याय बंद होना चाहिए और नई शुरुआत होनी चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की ओर से पिछले कुछ समय से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने आपत्तियां जताई हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हाल के दिनों में इस मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।
गहलोत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने पहले ही इस मुद्दे पर चिंता जताई थी, लेकिन उस समय उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी इस मामले पर विचार करने की मांग की।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को वैधानिक प्रक्रिया के तहत बताया जाता रहा है। आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। दूसरी ओर, विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका है। यही मुद्दा मौजूदा राजनीतिक विवाद के केंद्र में बना हुआ है।
गहलोत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से विवाद का एक अध्याय समाप्त हो सकता है और नई शुरुआत की जा सकती है। हालांकि, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर चुनाव आयोग की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।

